चुनाव प्रचार की जुगाड़ तकनीक तो
चुनाव प्रचार की जुगाड़ तकनीक तो

चुनाव प्रचार की जुगाड़ तकनीक तो देखिये

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। चुनावों का मौसम अपने अंजाम की ओर गतिमान है। कुछ राज्‍यों में यह अपनी गति को प्राप्‍त हो चुका है। टकटकी अब उत्‍तर प्रदेश पर लगी है। इस बार चुनाव में कोई आधुनिक तकनीक, डिजिटल इंडिया, इंडिया की बात कर रहा है तो कोई पूरी फिल्‍मी पटकथा के साथ मैदान में उतरा है। लेकिन इनमें कुछ ऐसे भी हैं जिन्‍हें खूबी मालूम है कि विकास और तकनीक की जितनी भी बात कर लो, भारतीय मानुस की सुई जाति और धर्म पर आकर अटक ही जाती है। चकल्‍लसी ने उत्‍तर प्रदेश में चुनाव प्रचार का जो जुगाड़ तकनीक देखा, उसके आगे सब मैनेजमेंट फेल।

पहला दृश्‍य

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सांकेतिक फोटो

एक दल का खुद्दार नेता पैदल घर-घर घूम रहा है। वह झक सफेद खद्दर की जेब में हमेशा स्‍टील का एक गिलास रखता है। खास बात यह कि घूम-घूम कर वह कर तो अपना प्रचार रहा है, लेकिन किसी से वोट नहीं मांग रहा है। खुद को निचली जाति का बताता है और ठाकुरों, ब्राह्मणों के दरवाजे के आगे जमीन पर बैठ जाता है। जब लोग कहते कि नीचे क्‍यों बैठ रहे हो… ढंग से ऊपर बैठ जाओ। तब वह कहता- ठाकुरों और ब्राह्मणों के सामने बैठने की हमारी तो परम्‍परा ही नहीं है। हम तो आदिकाल से ही इनके आश्रित रहे हैं। पूर्वजों ने तब यह नाफरमानी नहीं की तो अब कैसे कैसे कर सकते हैं। आलम यह है कि अगर कोई चाय पीने को भी कहता है तो वह अपनी गिलास में ही पीता है। इस प्रत्‍याशी के पिता पांच बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं।




यह सुनकर ठाकुरों और ब्राह्मणों का चेहरा दर्प से जगमगा उठता है। जैसे मन ही मन कह रहे हों, एक तुम ही हो जो परम्‍परा का निर्वहन कर रहा है, बाकि तो उद्दंड हो गए हैं। अपने सामने सवर्णों को फिक्रमंद देखकर नेता ने कुछ पल के सन्‍नाटे और कानाफूसी को तहस-नहस करते हुए नया पैंतरा खेला। उसने कुर्ते की दाहिनी जेब से गिलास निकाली और दोनों हाथों से पकड़कर याचना भरे स्‍वर में मुखाकृति को थोड़ा विकृत करते हुए कहा- ठाकुरो! पानी तो पिला दो। अपने सामने पानी के लिए एक नेता को घिघियाते देखकर ठाकुर विजयी भाव से उसे देखा और पीछे मुंह कर के घर के अंदर आदेश पहुंचाया – अरे पानी ले आ। फिर जग या लोटे को थोड़ा ऊपर रखते हुए उसके गिलास में पानी उड़ेल दिया। तब चेहरे पर तृप्ति और आभार का मिश्रित भाव लाते हुए नेता बोला – तुम्‍हारा पानी पीकर कर्जदार हो गया हूं … इस कर्ज को उतार सकूं, इसलिए सेवा का मौका देना। नेता ब्राह्मण के दरवाजे पर गया। वहां भी उसने यही पैंतरा आजमाया। ब्राह्मण भी गदगद।  दूसरे ही क्षण ग्राउंड रिपोर्ट। नेता का चेहरा टीवी पर दिखता है। उसके मुंह के पास ढेर सारे माइक हैं। सब पर चैनलों के नाम लिखे हुए हैं। एक साथ दो-दो जगह! नेता का जुगाड़ हिट हो गया।

दूसरा दृश्‍य

हिन्‍दुओं की आबादी वाले क्षेत्र में एक मु‍सलमान नेता घूम-घूम कर अपना प्रचार कर रहा है। उसके साथ जालीदार टोपी पहने कुछ समर्थक भी हैं। चलते-चलते नेता ऐसी जगह ठहर जाता, जहां उसे कुछ ‘वोट’ दिख जाता। फिर भाषण शुरू। भाषण के बीच में वह अपने साथ चल रहे लोगों से मुखातिब होकर कहता- मेरे पीछे चलकर तुम्‍हें क्‍या मिलेगा? मुझसे कोई उम्‍मीद मत रखो। निरपेक्ष हूं… मैं वो नहीं बोलूंगा जो तुम सुनने के लिए पीछे-पीछे चल रहे हो। इस तरह नेताजी कुछ बोलते भी नहीं और अपनी बात भी कह जाते। कानाफूसी शुरू। … बड़ा निरपेक्ष आदमी है। दूसरे ही क्षण ग्राउंड रिपोर्ट। नेता का चेहरा टीवी पर दिखता है। उसके मुंह के पास ढेर सारे माइक हैं। सब पर चैनलों के नाम लिखे हुए हैं। एक साथ दो-दो जगह! नेता का जुगाड़ यहां भी हिट!

तीसरा दृश्‍य

एक नेता अपने क्षेत्र में दूसरों की तरह साइकिल, जीप-कार या पैदल नहीं घूम रहा है। उसने गदह जुगाड़ लिया है। उसी पर हाथ जोड़े विनम्र मुस्‍कान के साथ बैठकर घूम रहा है। थोड़ी देर के लिए गदहे से उतरता है। मतलब की बात करता है और हाथ जोड़कर फिर गर्दभ पर सवार हो जाता है। मीडिया के लिए फिर नया मसाला। टीवी पर संवाददाता की ग्राउंड रिपोर्ट आने लगती है। अपने क्षेत्र के साथ टीवी पर भी नेता चेहरा चमक रहा है। उसके मुंह के पास ढेर सारे माइक हैं। सब पर चैनलों के नाम लिखे हुए हैं। एक साथ दो-दो जगह! नेता का जुगाड़ यहां भी हिट!

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