जेल में ठुमके
जेल में ठुमके

जेल में ठुमके

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सुना था होली केे दिन दुश्मन भी गले मिल जाते हैं। उस दिन हमने पुलिस वालों के साथ मिलकर थोड़ी मस्ती क्या कर ली लोगों ने आसमान सिर पर उठा दिया। जांच पर जांच की गई और चार अधिकारी सस्पेंड कर दिए। ऐसा कौनसा गुनाह हो गया था हमसे? किसी को गाली नहीं दी। मारपीट नहीं की। राजनीति नहीं की। कोई घोटाला नहीं किया। जेल तोडऩे की कोशिश नहीं की।
बता देता चाहते हैं, हमने उस दिन कोई असंवैधानिक कार्य नहीं किया। संविधान में जीने का अधिकार मौलिक अधिकार है, और खुलकर जीने का अधिकार डबल मौलिक अधिकार। अकेले कभी खुलकर जीया नहीं जाता। दो में जीया जाता है या गु्रप में जीया जाता है। उस दिन ग्रुप डांस ही था। वैसा ही ग्रुप डांस जैसा स्कूल कालेजों में होता है या नेताओं की आवभगत में होता है। फर्क सिर्फ इतना था कि बाहर फूल बरसाए जाते हैं हमने नोट बरसाए थे। अपनी अपनी कैपिसिटी है।
जेल की सडिय़ल जिंदगी काटते काटते हमको उस दिन पहली बार लगा था कि अच्छे दिन आ गए हैं। सबका साथ था, सबका विकास था। कोई अतिक्रमण नहीं था। यूरोप की जेलों में हिंसा होती है। भारत की जेलों में अध्यात्म के कैम्प आयोजित किए जाते हैं ताकि कैदी अपना जीवन सुधार सकें। कुछ प्रांतों में तो बाबा के योग भी कराए जा रहे हैं ताकि कैदी निरोगी रहें, समाज व देश के प्रति सकारात्मक भाव पैदा हो सके। हमने जेल में होली के दिन जेलर और कैदी की दूूरियां मिटाने का प्रयास किया था। लोगों ने सवाल दर सवाल खड़े कर दिए।
याद आती है उस दिन दरोगा ने क्या डांस किया था। कमाल। मैं नागिन तूं सपेरा के गाने पर दरोगा नागिन बनकर नाचा था। थोड़ी ज्यादा चढऩे के बाद उसे यह ध्यान ही नहीं रहा कि वह सपेरा है या नागिन। दरोगापन की तो बात ही दूर है। वह कमीना सबकुछ भूल गया था। डांस करने वाली वो रानी। क्या बात थी। रानी ने क्विंटल-क्विंटल के ढुंगे लगाए थे। उसने दरोगा के गाल खींच खींचकर लाल कर दिए थे। उस दिन मेरा जी ऐसा कर रहा था कि दरोगा के पिछवाड़े को भी मार मार कर लाल कर दूं। हर सप्ताह मिलाई की एवज में रिश्वत मांगता था। खैर होली के दिन तो सारे गिले शिकवे दूर हो गए थे। कोई अफसर, अफसर नहीं था, कोई कैदी, कैदी नहीं था। रानी ने ऐसा डांस किया था कि पूरी जेल में समानता का भाव भांग पीकर पसरा था। जेल में लगने वाली गर्मी जीने नहीं दे रही है और जेल की दिवार पर लगी रानी की वह लिपिस्टिक मरने नहीं दे रही है। ऐसा लगता है मानों आज भी वह गाना यहीं बज रहा है। यहीं पर। तूं चीज बड़ी है मस्त मस्त..।
होली के एक महीना बाद किसी ने उस डांस की विडियो फुटेज सोशल साइट पर वायरल कर दी। कर दी तो कर दी। भला इसमें गलत क्या हो गया। कुछ तो लोग कहेंगे। इसमें गलत क्या है? लोगों का मनोरंजन ही तो हुआ। किसी के दिल को ठेस तो नहीं लगी। किसी को दिल से बुरा नहीं लगा। टीवी वाले बधाई के पात्र हैं जिन्होंने इस मनोरंजन को खूब प्रमोट किया। उन्होंने भी कुछ गलत नहीं किया।
फिर गलत कहां हुआ, यह समझ से परे की बात है।  नाचना, गाना होली मनाना गलत है क्या? जिस दिन से राज्य सरकार ने चार पुलिस वाले सस्पेंड किए हैं तब से रानी के मेरे पास हजार फोन आ चुके हैं। पूछती है मेरा तो कुछ नहीं बिगड़ेगा जालिम। मैंने उसको बोल दिया है- रानी.. .. न तेरा कुछ जाएगा और न मेरा कुछ जाएगा। जाने वालों का जा चुका है। मैं कैदी रहा तो अगली होली पर फिर ठुमके लगवाउंगा। तब तक ऐसा कर तूं अपने दस-बीस एंडी-फैंडी गाने मेेेरे नंबर पर वाट्सेप कर दे।
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मनोज प्रभाकर
रोहतक, हरियाणा
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