पहचान छिपाने के लिए अर्जुन ने नृत्‍य
पहचान छिपाने के लिए अर्जुन ने नृत्‍य

पहचान छिपाने के लिए अर्जुन ने नृत्‍य और संगीत सीखा

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। कौरवों और पाण्‍डवों के बीच युद्ध लगभग तय हो चुका था। इसलिए अर्जुन अपनी शक्तियां बढ़ाने में लगा हुआ था। इसी सिलसिले में वह कुछ दिव्‍यास्‍त्र लेने इंद्रलोक गया। वहां से हथियार हासिल करने के बाद लौटते समय वह इंद्र से मिलने गया।

अर्जुन ने वापस लौटने की इजाजत मांगी तो इंद्र ने पूछा- तुम्‍हें सारे दिव्‍यास्‍त्र मिल गए? अर्जुन बोला- हांं। मुझे हथियार मिल गए हैं और इनका प्रयोग कैसे करना है, मैंने यह भी सीख लिया है। मैं सोच रहा हूं कि मुझे अब घर वापस लौट जाना चाहिए। तब इंद्र ने कहा-…लेकिन तुमने तो गंधर्व अस्‍त्र लिया ही नहीं। अर्जुन- गंधर्व अस्‍त्र का मैं क्‍या करूंगा? मैं एक योद्धा हूं… नाच-गाना सीख कर क्‍या करूंगा?

अर्जुन का जवाब सुनकर इंद्र ने समझाइश अंदाज में कहा – कला सबसे बड़ा हथियार है। इस पर अर्जुन ने कहा- यदि ऐसा है तो युद्ध खत्‍म होने के बाद मैं इसे सीख लूंगा। फिलहाल युद्ध सामने है और मुझे इस हथियार तथा इसके ज्ञान की जरूरत नहीं है। यह सुनकर इंद्र ने उसे समझाते हुए कहा कि जब युद्ध ही खत्‍म हो जाएगा तो इस हथियार और ज्ञान का क्‍या करोगे? याद रखो, तुम्‍हें एक साल अज्ञात वास में गुजारना है। तुम स्‍वयं को कैसे छिपाओगे? अपने असली रूप में खुद को छिपाना तुम्‍हारे लिए असंभव है। इसलिए तुम खुद को इस तरह तैयार करो कि अपनी पहचान छिपा कर कहीं रह सको।

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इंद्र की बात अर्जुन की समझ में आ गई और वह अप्‍सरा उर्वशी से नृत्‍य तथा गंधर्व चित्रसेन से संगीत सीखने के लिए तैयार हो गया। जल्‍दी ही वह एक बेहतरीन नर्तक बन गया। उसकी प्रतिभा को देखकर उर्वशी उस पर मोहित हो गई थी। एक दिन उर्वशी ने कहा- नृत्‍य कला में तुमने अपने गुरू को भी पीछे छोड़ दिया है। अर्जुन बोला- कोई भी शिष्‍य अपने गुरू से आगे नहीं निकल सकता। अगर आप मेरे नृत्‍य कौशल से खुश हैं तो इसका मतलब यह है कि आपको मेरे प्रदर्शन से कभी शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा।

अर्जुन की इस बात पर उर्वशी ने उसकी बहुत तारीफ की। उसने कहा, मुझे आश्‍चर्य हो रहा है कि तुम्‍हारे जैसा एक योद्धा इतना बेहतरीन डांस कर सकता है। तुमने असंभव को भी संभव कर दिखाया है। अगर तुम अप्‍सरा होते तो इंद्र के दरबार में तुम्‍हारी तूती बोलती।

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