क्‍या आप 'शीला की जवानी' गीत का भावार्थ
क्‍या आप 'शीला की जवानी' गीत का भावार्थ

क्‍या आप ‘शीला की जवानी’ गीत का भावार्थ जानते हैं?

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। इस भौतिक संसार में बेवजह कुछ भी नहीं होता है। उसी तरह कोई भी शब्‍द बेमतलब नहीं होता है। उसका कोई न कोई मतलब होता है। इस आध्‍यात्मिक प्रवचन के साथ हम एक गीत का भाव स्‍पष्‍ट करने जा रहे हैं, जिसके बारे में अमूमन लोग कहते हैं कि ये भी कोई गाना है। लेकिन वही लोग किसी उत्‍सव, पार्टी या शादी-ब्‍याह जैसे समारोहों में उसी गाने पर बौखलाहट वाला डांस करते दिख जाएंगे।

पहली कड़ी में हम एक उत्तेजक गीत का भावार्थ प्रस्‍तुत कर रहे हैं जो वीर शिरोमणि फिल्‍म ‘तीस मार खान’ से लिया गया है। इस गीत या गाना में नायिका के माध्‍यम से कवि उन पुरुषों पर अपमानजनक प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त कर रहा है जो नायिका के छरहरे संगमरमर जैसे शरीर पर आकर्षित हो जाते हैं। इस गीत में प्रयुक्‍त सभी शब्‍द वैसे पुरुषों के लिए नायिका के मुख कहवाए गए हैं। नायिका उन्हें सीधे और कटु शब्दों में बताना चाहती है कि शीशे के पीछे रसगुल्ले की ख्वाहिश करना एक बात है और उसे चखना दूसरी बात!

गाने की प्रथम दो पंक्तियां अंग्रेजी में हैं। इसके बाद नायिका तुरंत मातृभाषा पर आ जाती है। यह कहा नहीं जा सकता कि उसने ऐसा क्‍यों किया, परन्‍तु प्रतीत होता है कि उसने अपनी भावनाएं बहुतायत लोगों तक पहुंचाने के लिए ऐसा किया होगा।

I know you want it
But you never gonna get it.
तेरे हाथ कभी ना आनी
माने ना माने कोई दुनिया
ये सारी, मेरे इश्‍क की है दीवानी।

भावार्थ : गाने की शुरुआत नायिका के ईमानदारीपूर्ण वक्तव्य से होती है। वह कहती है … तुम क्‍या चाहते हो, मैं वो खूब समझती हूं। वह जानती है कि मर्दों को उसकी भावनाओं, दिल और प्रेम से कोई सरोकार नहीं है। मर्द तो बस एक ही चीज चाहते हैं, लेकिन वह उन्‍हें मिलने वाली नहीं है। उसे देखकर उनके मुंह में जो पानी भर जाता है, उसी से उन्‍हें अपनी प्‍यास बुझानी होगी। कवि कहता है कि यह दुर्भाग्‍यपूर्ण है, लेकिन शाश्‍वत सत्‍य है।

Hey hey, I know you want it
but you never gonna get it
तेरे हाथ कभी ना आनी
माने ना माने कोई दुनिया
ये सारी, मेरे इश्‍क की है दीवानी।
अब दिल करता है हौले-हौले से
मैं तो खुद को गले लगाऊं
किसी और की मुझको जरूरत क्‍या
मैं तो खुद से प्‍यार जताऊं।

नायिका पुनः दर्जनों पुरुषों में उसके प्रति जगी वासना पर प्रकाश डालती है। वह अपने अपने आस-पास मंडराते छिछोरों को बताती है कि उनकी दाल नहीं गलने वाली है। साथ ही, यहाँ नायिका के व्यक्तित्व का एक और पक्ष उजागर होता है। वह है सौंदर्य से जागृत अहंकार का पक्ष। वह अपनी सुन्दरता से इतनी आत्‍ममुग्‍ध है कि उसे किसी पुरुष की ज़रूरत ही नहीं है। वह अपने अन्दर की स्त्री के लिए खुद ही पुरुष बन जाना चाहती है। अब इसे अहंकार की पराकाष्ठा कहें या आत्म-प्रेम की मादकता!

what’s my name
what’s my name
what’s my name
My name is Sheela
शीला की जवानी
I’m just sexy for you
मैं तेरे हाथ ना आनी
ना ना ना शीला
शीला की जवानी
I’m just sexy for you
मैं तेरे हाथ ना आनी।

इतना कहने के बाद भी जब छिछोरे मर्द उसे घूरते रहते हैं तब नायिका से बर्दाश्‍त नहीं होता है। पहले वह सबसे पूछती है… मेरा नाम क्‍या है जानते हो…बार-बार अपना सवाल दोहराने के बाद नायिका अपना परिचय देती है। वह अपना नाम बताती है और नाम भी ऐसा जो बूढ़ों में भी कामुकता भर दे। उनमें यौवन का झंझावात ला दे। वह नाम बताने के साथ यह भी बताती है कि वह बहुत ज्‍यादा सेक्‍सी है। अर्थात् वह अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बन जाती है। परन्‍तु इस आत्म-प्रशंसा में अहंकार का भाव भी है। खुद को बेहद सेक्‍सी बताते हुए कहती है कि वह सब की पहुंच से बाहर है। अर्थात् वह उस चन्द्रमा की तरह है, जिसकी चांदनी तो सबको उपलब्ध है, परन्‍तु उस चॉंद को स्‍पर्श कर के उसे महसूस करना किसी के बस की बात नहीं है।

Take it off
Take it off
Take it off
Take it off

अब नायिका सीधे शब्दों में चुनौती देती है। एक ऐसी चुनौती जो शायद मर्दों में मदिरा के बिना भी साहस ला दे।

Silly silly silly silly boys
O o o you’re so silly
मुझे बोलो बोले करते हैं
ओ ओ ओ हां जब उनकी तरफ देखूं
बातें हौले-हौले करते हैं
है मगर बेअसर मुझ पर हर पैंतरा

मर्द फिर भी उसे घूरते ही रहते हैं तब नायिका उनका उपहास करती है। उन्‍हें मूर्ख और महामूर्ख कहकर पुकारती है। उन्‍हें अपमानित करती है। कहती है मुझसे कहते हैं कि बोलो बोलो, लेकिन जब उनकी तरफ देखती हूं तो वह खुसर-फुसर करने लगते हैं। मेरे सामने उनकी जुबान ही नहीं खुलती है। परन्‍तु मर्दों के किसी भी पैंतरे का उस पर कोई असर नहीं होने वाला है। उनकी दाल नहीं गलने वाली।

हाय रे ऐसे तरसे हमको
हो गए सौ अरसे रे
सूखे दिल पे मेघा बन के
तेरी नजरिया बरसे रे।

इतनी चुनौतियों के बाद आखिरकार वासना से मदहोश मर्द कुछ बोलने की हिम्मत जुटा ही लेते हैं। वे मद्धम स्वर में अपनी इच्छा ज़ाहिर करते हैं। कहते हैं कि नायिका की फिसलन वाली छरहरी काया उनके बंजर दिलों में प्रेम का अंकुर उत्‍पन्‍न कर रहा है। मानो नायिका को उनकी असली इच्छा का पता ही नहीं है। इसलिए वह उन्हें फिर से याद दिलाती है कि तुम सब दिन में सपने देखना छोड़ दो।

पैसा, गाड़ी, महंगा घर
I Need A Man Who Give Me All That
जेबें खाली फटीचर
No No I Don’t Like Him Like That

तमाम नखरों के बाद आखिरकार वह अपने असली रूप में आ ही जाती है। नायिका कहती है, मुझे एक ऐसा इनसान चाहिए जो मुझे धन-दौलत, महंगी गाड़ी और शानदार घर दे। फिर तत्‍क्षण छिछोरे मर्दों को देख कर जैसे गरीबी की कल्‍पना भर से ही उसकी रूह कांप जाती है और वह कहती है- तुम सब फटीचर हो। तुम्‍हारी जेब में दो कौड़ी भी नहीं है। चलो चलो दफा हो जाओ। तुम मेरे लायक नहीं हो सकते।

चल यहां से निकल, तुझे सब ला दूंगा
क़दमों में तेरे लाके जग रख दूंगा
ख्‍वाब मैं कर दूंगा पूरे
न रहेंगे अधूरे
You Know I’m Going To Love You Like That, Whatever

इतना सब सुनने के बाद भी मर्द कहां मानने वाले। वे नायिका को मनाने की हर संभव कोशिश करते हैं। कहते हैं पहले यहां से चल तो सही… तुझे लाकर दूंगा। तुम्‍हारी सारी इच्‍छाएं पूरी करूंगा। पैसा, गाड़ी, घर ही नहीं, तुम्‍हारे कदमों में पूरी दुनिया लाकर रख दूंगा। तुम्‍हारे सारे अरमान पूरे कर दूंगा, एक भी अरमान अधूरा नहीं रहेगा। तब नायिका खुश होकर कहती है… तब तो तुम जो कोई भी हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। समझ लो कि मैं तो तुमसे ही प्रेम करती हूं।

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