गांधारी पहली बार भेड़ से ब्‍याही गई
गांधारी पहली बार भेड़ से ब्‍याही गई

गांधारी पहली बार भेड़ से ब्‍याही गई

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महाभारत कथा-1

सुबल गांधार के राजा थे। गांधार का नया नाम कंधार है जो अफगानिस्‍तान में पड़ता है। मौजूदा व्‍यवस्‍था के हिसाब से पेशावर, मुल्‍तान, काबुल और कंदहार का क्षेत्र ही गांधार होना चाहिए। सुबल धार्मिक प्रवृत्ति के व्‍यक्ति थे। उनकी कई संतानें थीं- जिनमें गांधारी और शकुनि प्रमुख थे।

एकबार की बात है, सुबल ने अपने राज्‍य में एक बहुत बड़ा धार्मिक अनुष्‍ठान कराया। इस यज्ञ में एक ज्‍योतिषी भी शामिल हुआ था। गांधारी का भाग्‍य बांचने के बाद उसने राजा से कहा कि जिससे इसका विवाह होगा वह खुदागंज को कूच कर जाएगा। ज्‍योतिषी ने जुगाड़ निकाला और सुबल को सलाह दी कि यदि वह गांधारी का विवाह भेड़ या बकरे से कर दें तो तकदीर गांधारी और उसके परिवार पर मेहरबान हो जाएगी। ज्‍योतिषी की सलाह पर राजा सुबल ने गांधारी का विवाह भेड़ से कर दिया। वैसे गांधारी का ब्‍याह वट वृक्ष से करने की भी कथा प्रचलित है। खैर, शादी के बाद वर टें बोल गया। अब टेक्‍नीकली गांधारी विधवा हो चुकी थी। हालांकि यह बहुत मामूली बात थी, लेकिन विवाह के समय धृतराष्‍ट्र से छिपाई गई थी।

धृतराष्‍ट्र कुरु साम्राज्‍य के सबसे बड़ा बेटा था। कायदे से उसे ही हस्तिनापुर का युवराज होना चाहिए था। लेकिन वह हैंडीकैप (दिव्‍यांग) यानी बचपन से ही अंधा था, इसलिए राजकाज उसे सौंपने का रिस्‍क नहीं लिया जा सकता था। पूरे आर्यावर्त में सभी को मालूम थी कि धृतराष्‍ट्र हैंडीकैप है। इस वजह से कोई भी अपनी बेटी की शादी उससे नहीं करना चाहता था। तब जाकर खुद भीष्‍म ने लड़की ढ़ूंढ़ना शुरू किया। भीष्‍म ने रिश्‍ते के लिए गांधार में दूत भेजा, इसलिए सुबल इनकार करने की हिम्‍मत नहीं जुटा सके। उन दिनों कोई सपने में भी भीष्‍म से पंगा लेने का साहस नहीं जुटा पाता था। किसी कारण से अगर भीष्‍म से सामना भी होता तो लोग मन ही मन संकटमोचन पाठ करने लगते थे।

मुझे इस बात से क्‍या लेना कि सुबल बेटी की बेमेल शादी के लिए कैसे राजी हो गए। इसके पीछे डर था या कराकोरम जैसी दुर्गम पहाडि़यों और अलग-थलग देश से बाहर साम्राज्‍य विस्‍तार की राजनीतिक महत्‍वाकांक्षा। इतना जानता हूं कि धृतराष्‍ट्र ही एकमात्र शख्‍स था जिसकी शादी हस्तिनापुर में हुई। मतलब बारात गई नहीं, लड़की वाले ही टिन टप्‍पर उठाकर आ गए। अब कोई कहेगा कि विचित्रवीर्य से अंबिका और अंबालिका का विवाह भी तो हस्तिनापुर में ही हुआ था। तो उनकी जानकारी के लिए बता दूं कि यह पूरी तरह से किडनैपिंग का मामला था। दोनों लड़कियों को अगवा करके लाया गया, फिर उनकी शादी कराई गई।

बहरहाल, जब गांधारी को पता चला कि उसकी शादी हैंडीकैप से हो रही है तो उसने अपनी मर्जी से उम्र भर के लिए अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली। गांधारी सर्वगुण संपन्‍न और सुंदर थी। उसकी सुंदरता की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी। उसे महर्षि व्‍यास से 100 पुत्रों का वरदान मिला हुआ था। भीष्‍म यह बात जानते थे। वह चाहते थे कि किसी तरह धृतराष्‍ट्र का बैंड बज जाए और उसका वंश आगे बढ़े। रिश्‍ता तय होने के बाद शकुनि अपनी बहन को लेकर हस्तिनापुर आया और दोनों की शादी कराने के बाद गांधार लौट आया। इसके बाद 30 साल तक शकुनि महाभारत में कहीं नहीं दिखा।

एक बार किसी तरह धृतराष्‍ट्र को गांधारी की पहली शादी की बात पता चल गई। उसे लगा कि मेरे साथ तो धोखा हो गया। उसे बहुत गुस्‍सा आया और उसने समूचे सुबल वंश को ही मजा चखाने की ठान ली। कहा तो यह भी जाता है कि सारा रायता भीम के चलते फैला। भीम ने ही दुर्योधन को ‘विधवा का गोलक’ कह कर मजाक उड़ाया और बवाल बढ़ा। लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।

                                                                                                     (जारी है…)

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1 Comment

  1. अति रोचक कथा….लेकिन हमारे यहाँ…यह लोक कथा प्रचलित है कि…..गांधारी का विवाह….वट वृक्ष से हुआ था…..खैर….यह भी सही है…..

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