कुन्तिभोज की दत्‍तक पुत्री थी
कुन्तिभोज की दत्‍तक पुत्री थी

कुन्तिभोज की दत्‍तक पुत्री थी कुन्‍ती

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। द्वापर युग के दौरान ब्रजमंडल (महाजनपद) में वृष्णिवंश के राजा शूरसेन का शासन था। महाजनपद उत्‍तर भारत का प्रसिद्ध जनपद था जिसकी राजधानी मथुरा थी। शूरसेन के फुफेरे भाई का नाम कुन्तिभोज था।

कुन्तिभोज धर्मात्‍मा टाइप व्‍यक्ति थे। चूंकि वे साधु-संतों की सेवा करते थे इसलिए आए दिन उनके यहां बड़े-बड़े सिद्ध ऋषियों का आना-जाना लगा रहता था। इतना कुछ होने के बाद भी उन्‍हें एक बात की टेंशन रहती थी। कुन्तिभोज की कोई संतान नहीं थी। वह शूरसेन के किसी बच्‍चे को गोद लेना चाहते थे। उन्‍होंने शूरसेन को अपनी इच्‍छा बताई तो वह भी तैयार हो गए। शूरसेन ने प्रॉमिस किया कि वह अपनी पहली संतान कुन्तिभोज के हवाले कर देंगे।

कुछ समय बाद शूरसेन के घर एक लड़की का जन्‍म हुआ, जिसका नाम पृथा रखा गया। सुंदरता और गुण में उसके जैसा कोई नहीं था। वादे के मुताबिक शूरसेन ने पृथा को कुन्तिभोज को सौंप दिया। चूंकि बच्‍ची अपने पालक पिता कुन्तिभोज के यहा पली-बढ़ी, इसलिए वह कुन्‍ती नाम से ही प्रसिद्ध हो गई।

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