पापा ही सुझा रहे हैं साइकिल पंक्‍चर
पापा ही सुझा रहे हैं साइकिल पंक्‍चर

पापा ही सुझा रहे हैं साइकिल पंक्‍चर करने का आइडिया

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। यूपी में सपा-कांग्रेस गठजोड़ के बाद अखिलेश यादव कह रहे हैं कि वे और राहुल साइकिल के दो पहिये हैं। लेकिन उनके पिताजी पहियों को पंंचर करने के आइडियाज सुझा रहे हैं। खिसियाकर दिल्‍ली लौटने के बाद मुलायम सिंह यादव ने पार्टी में अपने बचे-खुचे समर्थकों से कहा कि कांग्रेस जहां-जहां से चुनाव लड़ रही है, वहां-वहां से पर्चे भरो।

दरअसल, अखिलेश की हालत उस नौसिखुआ जिदृी बच्‍चे जैसी है जो साम, दाम, दंड, भेद जैसी वैदिक नीतियां अपना कर मां-बाप से नई साइकिल खरीदवा लेता है। जब नई साइकिल मिल जाती है तो उसे मर्सिडीज की तरह भगाने लगता है। गनीमत है कि साइकिल में उड़ने वाले फीचर नहीं होते, वरना ई लड़का तो उसे रॉकेट बना देता। उधर, मुलायम की स्थिति उस लाचार पिता जैसी है जो बेटे को फुल स्‍पीड में साइकिल भगाता देख किसी हादसे की आशंका से घबराता रहता है।

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कांग्रेस के साथ सपा के गठबंधन से मुलायम भड़के हुए हैं। उन्‍हें बेटे की कितनी चिंता है यह तो मुलायम जानें या अखिलेश जानें। पर हां, उनकी सबसे बड़ी टेंशन है मुस्लिम वोट। कह रहे हैं कि मुस्लिम मतदाता पहले कांग्रेस के थे और उन्‍होंने कांग्रेस से लड़कर मुस्लिम मतदाताओं का भरोसा जीता। डर है कि बिहार में जदयू से गठबंधन के बाद जैसे राजद का जिन्‍न बोतल से बाहर निकलकर भौकाल हो गया, अगर कांग्रेस भी वैसी ही भौकाल हो गई समूचा मुस्लिम वोट फिर उसी के पास चला जाएगा।

मतलब यह है कि पिता-पुत्र का कॉन्फिडेंस हिला हुआ है और दोनों ही एक-दूसरे की नहीं सुन रहे हैं। मुलायम अपने बेटे को समझाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि बेटा डबल लोडि़ग मत चलाओ बैलेंस तो गड़बड़ाएगा ही, साइकिल को भी नुकसान पहुंचेगा। कांग्रेस के साथ गठबंधन पार्टी को डूबा देगी। इसलिए वह कार्यकर्ताओं को उन 105 सीटों से पर्चे भरने को उकसा रहे हैं जहां से कांग्रेस चुनाव लड़ रही है। मतलब जो भी उम्‍मीद बची है उसे पूरी तरह धराशाई करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। उधर, अखिलेश कह रहे हैं कि सपा पहले दिल्‍ली के आसपास कमजोर थी, लेकिन अब मजबूत हो जाएगी। गठबंधन जीता तो ‘नेताजी का सम्‍मान’ और बढ़ जाएगा।

मुलायम एक और बात से चिढ़े हुए हैं। उन्‍हाेंने अखिलेश को 38 उम्‍मीदवारों की सूची सौंपी थी। इसमें से कई नाम उन्‍होंने डस्‍टबिन में डाल दिए। इस पर मुलायम ने कहा कि जिन्‍हें टिकट नहीं मिला वो बेचारे तो अब पांच साल तक कहीं से चुनाव ही नहीं लड़ सकेंगे। सबकुछ देखने के बावजूद अगर कोई अपनी पैरवी अापसे कराता है तो इसमें गलती किसकी है? सजा भी तो उसे ही भुगतनी होगी न। आप काहे टेंशन लेते हैं?

(डिसक्लेमरः यह सिर्फ चकल्‍लस है। इसका उद्देश्‍य किसी को आहत करना नहीं है।)

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