लोकतंत्र का 'भूत' चुर्र-चुर्र कर रहा है
लोकतंत्र का 'भूत' चुर्र-चुर्र कर रहा है

लोकतंत्र का ‘भूत’ चुर्र-चुर्र कर रहा है

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नोटबंदी का रायता फैलता ही जा रहा है। 28 दिसंबर को देश ठप, इससे पहले संसद ठप। एटीएम तो पहले से ही ठप हैं। फल-फूल रहा है तो बस पेटीएम। हरियाणा वाले प्रधानमंत्री के नोटबंदी वाले फैसले पर विपक्ष के हंगामे को अपने ही चकल्‍लसी नजरिये से देखते हैं। उनका नजरिया जानने के लिए नीचे लिखी हरियाणवी लघु कथा पढ़ें—

एक बार, एक जाट ने श्‍मशान घाट में हल जोड़ दिया। भूत कितै (कहीं) बाहर जा रहा था।
भूतनी जाट न डरावन खातिर कांव कांव करण लागी, पर जाट न कोई परवाह नही की।
आख़िर भूतनी बोली- जाट तू यो के करै सै (तुम यह क्‍या कर रहे हो)
जाट बोल्या- मैं यहां बाजरा बोवुंगा।
भूतनी बोली- हम कित रवैंगे (हम कहां रहेंगे)
जाट बोल्या- मनै थारा ठेका कोनी ले राख्या (मैंने तेरा ठेका नहीं ले रखा है)।
भूतनी बोली- तू म्हारे घर का नास मत कर। इसके बदले हम तेरे घर मै 100 मण बाजरा भिजवा देगें। .
जाट बोल्या- ठीक सै, लेकिन बाजरा कल पहुॅचना चाहिए। नहीं तो मैं फेर आके हल जोड़ दूंगा। शाम नै भूत घर आया तो भूतनी बोली- आज तो नास होग्या था, न्यूं न्यूं बणी (जैसे-तैसे बात बनी)। जाट 100 मण बाजरे में मान्या सै (जाट 100 मन बाजरे में माना है)।

भूत ने भोत गुस्सा आया। भूत बोल्या – तने क्यों 100 मण बाजरे की ओट्टी (तुमने 100 मन बाजरे का वादा क्‍यों किया)। मन्ने इसे जाट भतेरे देखे सै (मैंने ऐसे जाट बहुत देखे हैं)। मन्नह उसका घर बता मैं उसने सीधा कर दूंगा।

भूत जाट के घर गया। जाट के घर मैं एक बिल्ली हील रही थी। वो रोज आके दूध पी जाया करती। जाट ने खिड़की में एक सिकंजा लगा लिया और रस्सी पकड़ के बैठ गया। सोचा, आज बिल्ली आवेगी और मैं उसने पकडूँगा। भूत न सोची तू खिड़की म बड़के जाट न डरा दे (भूत ने सोचा कि खिड़की के अंदर से ही जाट को क्‍यों न डरा दूं)।
वो भीतर न नाड़ (गर्दन) करके खुर्र-खुर्र करने लगा। जाट नै सोची – बिल्ली आगी। उसने फट रस्सी खींची और भूत की नाड़ सिकंजे मैं फंस गी। वो चिर्र – चिर्र करने लगा।
जाट बोल्या- रै तू कोण सै?
भूत बोल्या- मैं भूत सूं।
जाट बोल्या- अङै के करै सै (यहां क्‍या कर रहे हो)?
भूत बोल्या – मैं तो न्यू बुझण आया था के तू 100 मण बाजरे मैं मान ज्यागा या पूली भी साथै भिजवानी सै। (मैं तो यह पता करने आया था कि तुम 100 मन बाजरे में मान जाओगे या पूली* भी साथ में भिजवानी है)।

मोदी ने श्‍मशान में ऐसा हल जोता है कि संसद के अंदर और बाहर भूत “चुर्र चुर्र” करने लगे है। पर ये मोदी बाजरी लिए बिना मानेगा कोई ना। (इसमें भूत विपक्ष को माना जाए।)

* पूली- हरियाणा में बाजरे या ज्वार को सुखाने के बाद चारे के रूप में जो बांधा जाता है, उसे पूली कहा जाता है। 

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