बाबा! सरस्‍वती विलुप्‍त हो गई है ... अब
बाबा! सरस्‍वती विलुप्‍त हो गई है ... अब

बाबा! सरस्‍वती विलुप्‍त हो गई है … अब नहीं आएगी

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। यूपी में सपा-कांग्रेस साथ-साथ चुनाव लड़ रही है। दोनों कह रहे हैं कि ‘यूपी को यह साथ पसंद है।’ लेकिन मुलायम सिंह यादव को ही बेटे का कांग्रेसियों के साथ उठना-बैठना पसंद नहीं तो बाहर की क्‍या बात करें। उधर, अखिलेश यादव और राहुल गांधी के साथ रविवार को गलबहियां डाले सड़क पर घूम रहे थे। मुलायम यह सब देखकर मन ही मन कुढ़ रहे थे। जब रहा नहीं गया तो चुपचाप तत्‍काल में दिल्‍ली की फ्लाइट बुक कराई और लखनऊ से निकल गए।

हुआ यूं कि अखिलेश-राहुल मीडिया वालों के सामने अपनी नई-नई दोस्‍ती को आयाम देने में जुटे थे। दोस्‍ती की नई इबारत लिख रहे थे। अब पत्रकारों को तो जानते ही हैं। खोद-खोद कर सवाल पूछ रहे थे। पत्रकारों ने राहुल से ऐसे-ऐसे सवाल पूछे कि बेचारे पसीने-पसीने हो गए। किसी ने पूछ लिया- राहुल जी, आप तो पूरे यूपी में खटिया लेकर घूम रहे थे। सपा सरकार को कोस रहे थे। कह रहे थे ’27 साल यूपी बेहाल’ …अब अचानक उल्‍टी धारा क्‍यों बहने लगी। राहुल गांधी चुप। मन ही मन बोले – जहां-जहां यह नारा लिखवाया था उसे पुतवा भी तो रहा हूं। यह तो हमारे लिए था ’27 साल से यूपी में बेहाल’।

एक ने पूछा, अखिलेश के पांच साल के कामकाज को कितने अंक देंगे? राहुल ने बात को गठबंधन की ओर मोड़ने की कोशिश की। बोले- बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय। अर्थात् हम पिछले पांच साल नहीं, अगले पांच साल की बात कर रहे हैं। कसम से पत्रकार वार्ता को देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे राहुल रैपिड फायर राउंड में हॉट सीट पर बैठे हों। एक सज्‍जन ने पूछा कि 21 साल पहले नरसिम्‍हा राव ने बसपा के साथ दोस्‍ती की थी और आप सपा के साथ। बसपा के साथ गठबंधन में क्‍या खराबी थी? वह झेंप गए। फिर दार्शनिक अंदाज में बोले- अभी तो गंगा-यमुना का मिलन हुआ है… आगे चलकर सरस्‍वती भी निकलेगी।

अब कौन समझाए… सरस्‍वती विलुप्‍त हो गई है। अब नहीं आएगी। कभी नहीं आएगी। हरियाणा में जाकर देख लो। वहां की सरकार ने इसकी खोज में किसानों की कितनी जमीनें खोद डालीं। लेकिन सरस्‍वती हो तब तो मिले। उन्‍हें तो यह भी नहीं मालूम कि ये जो नई दोस्‍ती हुई है, उसमें गंगा कौन और यमुना कौन है? फिर भी यही रट लगाते रहे कि संगम होगा। सरस्‍वती इलाहाबाद संगम में निकलेगी।

खैर, रैपिड फायर राउंड के बाद उधर दोनों घूमने निकल गए। इधर, नेताजी दिल्‍ली पहुंच गए और दोस्‍ती में पलीता लगा दिया। बोले- मुझे दोनों का साथ पसंद नहीं है। सपा अकेले चुनाव लड़ने और जीतने में सक्षम थी। पार्टी को किसी सहारे की जरूरत नहीं थी। मैं तो अब प्रचार ही नहीं करूंगा।

(डिसक्लेमरः यह सिर्फ चकल्‍लस है। इसका उद्देश्‍य किसी को आहत करना नहीं है।)

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