शशिकला वीडियो रिकॉर्डिंग के बहाने
शशिकला वीडियो रिकॉर्डिंग के बहाने

शशिकला वीडियो रिकॉर्डिंग के बहाने जयललिता के करीब आई

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। ‘चिन्‍नम्‍मा’ यानी छोटी मां के नाम प्रसिद्ध शशिकला नटराजन की आज जो हैसियत है, तीन दशक पहले ऐसी नहीं थी। उन दिनों शशिकला एक मामूली गृहिणी थी और आर्थिक तंगी में जिंदगी बिता रही थी। लेकिन उनकी महत्‍वाकांक्षा बहुत बड़ी थी और उसे पूरा करने के लिए उन्‍होंने बहुत पापड़ बेले हैं। शशिकला ने स्‍कूली शिक्षा भी पूरी नहीं की।

शशिकला शुरू से ही फिल्‍मों की बेहद शौकीन रही हैं। हमेशा सुपर स्‍टार जैसी जिंदगी के सपने देखा करती थीं। शशिकला के पति एम. नटराजन तमिलनाडु सरकार में जनसंपर्क अधिकारी (PRO) थे। हालांकि उनकी नौकरी पक्‍की नहीं थी। चूंकि वह आईएएस और कुड्डालोर की जिला आयुक्‍त वीएस चंद्रलेखा के साथ काम करते थे, इसलिए उनसे अच्‍छी जान-पहचान थी।

सुब्रमण्‍यम स्‍वामी के साथ चंद्रलेखा।

सुब्रमण्‍यम स्‍वामी के साथ चंद्रलेखा।

चंद्रलेखा (बाद में जनता पार्टी की अध्‍यक्ष भी बनीं) उस समय मुख्‍यमंत्री एमजीआर के करीबी थीं। 1976 में जब शशिकला के पति की नौकरी चली गई तो परिवार कर्ज में डूब गया। उन्‍हें अपने जेवर तक बेचने पड़ गए। उस समय शशिकला करीब 19-20 साल की थी। पारिवारिक हालत अच्‍छी नहीं थी इसलिए शशिकला ने भाड़ा पर वीडियो चलाने का कम शुरू किया। बाद में उन्‍हाेंने शादी और दूसरे कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग के लिए एक वीडियो कैमरा भी खरीद लिया।

1980 के शुरुआती दशक की बात है। राजनीति में जयललिता का कद तेजी से बढ़ रहा था। शशिकला की नजर उन पर थी। शशिकला AIADMK से वीडियो रिकॉर्डिंग का कांट्रैक्‍ट लेना चाहती थी, लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्‍ता नहीं सूझ रहा था। तब उन्‍होंने अपने पति को चंद्रकला से बात करने को कहा। जयललिता तक पहुंचने का एकमात्र रास्‍ता चंद्रकला ही थीं। नटराजन के कहने पर चंद्रकला ने शशिकला को जयललिता से मिलवा दिया और किसी तरह AIADMK के कार्यक्रमों की वीडियो रिकॉर्डिंग का कांट्रैक्‍ट भी दिलवा दिया।

चूंकि शशिकला आईएएस अधिकारी चंद्रलेखा के बेटे की देखभाल भी किया करती थी। इसलिए चंद्रलेखा ने इस एहसान के बदले उनका काम कर दिया। उस समय जयललिता में प्रचार सचिव थीं। जयललिता से एक बार मिलने के बाद शशिकला ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जयललिता से नजदीकी बढ़ाने के लिए वह पार्टी में भी शामिल हो गई। इसके बाद तो शशिकला ने उनके करीब आने का कोई मौका नहीं छोड़ा। एक समय ऐसा आया जब वह जयललिता की सबसे करीबी विश्‍वासपात्र बन गईं। वह उनके अच्‍छे और बुरे दिनों में हमेशा साथ रहीं।

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