सरकार में शशिकला का कद जयललिता से ऊंचा
सरकार में शशिकला का कद जयललिता से ऊंचा

सरकार में शशिकला का कद जयललिता से ऊंचा रहा

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। विधानसभा चुनाव में जे: जयललिता की अगुआई में अन्‍नाद्रमुक बहुमत से जीत कर आई और क्‍लीन स्‍वीप किया और वह पहली बार मुख्‍यमंत्री बनीं। जयललिता से राजनीतिक संबंधों के कारण कल्‍लार परिवार समुदाय, खासकर शशिकला और उनके परिवार के लोगों को फायदा हुआ। इस जंबो जेट परिवार में पति एम. नटराजन के अलावा शशिकला के भाई, भतीजे-भतीजियां, भांजे-भांजियां और देवर शामिल थे जो चॉंदी काट रहे थे। जयललिता को भी फायदा हुआ, क्‍योंकि कल्‍लार समुदाय के रूप में उन्‍हें बड़ा वोट बैंक मिल गया था।

जयललिता के मुख्‍यमंत्री बनते ही शशिकला भी मजबूत हो गईं। हकीकत में सरकार में उनका कद जयललिता से भी ज्‍यादा ऊंचा हो गया था। सरकार के अधिकांश मंत्री सीधे उनके निर्देश पर काम करते थे। कहा जाता है कि जयललिता हमेशा शशिकला के परिवार के सदस्‍यों से घिरी रहती थीं। सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने ही शशिकला के परिजनों को ‘मन्‍नारगुड़ी माफिया’ नाम दिया था।

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शशिकला का जन्‍म मन्‍नारगुड़ी में ही हुआ था। कहा जाता है कि 1989 में शशिकला जब पहली बार जयललिता के बंगले में साथ रहने आईं तब उनके साथ मन्‍नारगुड़ी से 40 नौकर भी आए थे, जिन्‍हें घर का संभालने के लिए लाया गया था। इनमें नौकरानी, रसाइया, सुरक्षार्मी, ड्राइवर और संदेशवाहक भी थे। अालम यह था कि 1996 तक शशिकला की मदद से परिवार का हर सदस्‍य मालामाल हो चुका था। ये सभी गलत तरीके से पैसा बना रहे थे।

पहले तो यह बात परदे में रही। लेकिन धीरे-धीरे राज्‍य में, इसके बाद दूसरे राज्‍य और फिर पूरे देश में यह बात फैल गई। 1996 के चुनाव में जयललिता की हार की सबसे बड़ी वजह यही थी। दो साल बाद 1998 में जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई में एनडीए की सरकार बनी तो जयललिता की पार्टी उसमें सहयोगी बनी। लेकिन यह साथ ज्‍यादा लंबा नहीं चला।

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