शशिकला का परिवार शुरू से ही जयललिता को
शशिकला का परिवार शुरू से ही जयललिता को

शशिकला का परिवार शुरू से ही जयललिता को रास्‍ते से हटाने की फिराक में था

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। जयललिता पर वीके शशिकला ने क्‍या जादू किया था, यह तो कोई नहीं जानता। शशिकला परछाई की तरह जयललिता के साथ-साथ चलती थी। जयललिता एक तरह से उन्‍हीं पर निर्भर होकर रह गई थीं। लेकिन परदे के पीछे कुछ ऐसा चल रहा था जो बेहद घातक था। इसकी भनक जयललिता को तब लगी जब वो 2011 में फिर से मुख्‍यमंत्री बनीं।

jaya-shashi1_nukkadtimes‘तहलका’ पत्रिका के मुताबिक, गुजरात के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुख्‍यात मन्‍नारगुड़ी माफिया के षड्यंत्रों के खिलाफ जयललिता को आगाह किया था। उन्‍होंने जयललिता को बताया कि निवेशक तमिलनाडु छोड़कर जा रहे हैं, क्‍योंकि शशिकला और उनका परिवार उनसे पैसे मांगता है। रिपोर्ट में एक एनआरआई के बारे में कहा गया कि वह तमिलनाडु में परियोजना लगाना चाहता था, लेकिन मन्‍नारगुड़ी माफिया ने उससे 15 फीसदी कमीशन मांगा। लिहाजा उसे अपना प्रोजेक्‍ट गुजरात शि‍फ्ट करना पड़ा।

मोदी से जयललिता की मुलाकात के थोड़े ही दिन बाद चेन्‍नई मोनोरेल परियोजना से जुड़ा मामला आया जिसने उनकी आंखें खोल दी। दरअसल, जयललिता इस परियोजना का ठेका सिंगापुर की कंपनी को देना चाहती थीं। उन्‍होंने मुख्‍य सचिव देबेंद्रनाथ सारंगी को इस पर काम करने के लिए भी बोल दिया था। लेकिन जब फाइल जयललिता के पास पहुंची तो उन्‍होंने देखा कि मलेशिया की एक कंपनी को सबसे ऊपर रखा गया है, जबकि सिंगापुर वाली कंपनी को नीचे।

दूसरी खबर तो बेहद खतरनाक थी। जयललिता को बताया गया कि उन्‍हें संदिग्‍ध तरीके से जहर दिया जा रहा है। उन दिनों जयललिता की तबीयत थोड़ी नासाज रहती थी। घर पर उनकी देखभाल के लिए शशिकला ने ही एक नर्स रखा था जो दवा के साथ उनके खाने-पीने का ख्‍याल रखती थी। इस सूचना के बाद शशिकला को बताए बिना जयललिता हेल्‍थ चेकअप के लिए डॉक्‍टर के पास पहुंच गईं। जांच में इस बात की पुष्टि हो गई कि उन्‍हें जो दर्द निवारक दवा और रासायनिक पदार्थ दिए जाते थे उनमें आर्सेनिक की मात्रा थी। यानी उन्‍हें धीमा जहर दिया जा रहा था।

इसके अलावा, जयललिता को एक और बात पता चली थी। वह यह थी कि बेंगलुरु में मन्‍नारगुड़ी माफिया ने एक बैठक की थी। इसमें जयललिता को सत्‍ता से बेदखल कर शशिकला को मुख्‍यमंत्री बनाने की योजना बनाई गई थी। मन्‍नारगुड़ी माफिया की योजना यह थी कि आय से अधिक संपत्ति मामले में जब बंगलोर हाईकोर्ट जयललिता को जेल भेज देगा तो शशिकला को मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर बैठाना आसान होगा।

यह सब देख-सुन कर जयललिता का धैर्य जवाब दे गया। 17 दिसंबर, 2011 को जयललिता ने मन्‍नारगुड़ी गुट को बोरिया बिस्‍तर समेट कर घर से जाने का फरमान सुना दिया। यहां तक की शशिकला को भी पार्टी से निकाल दिया। उनके परिवार के कुछ लोगों को अवैध तरीके से धन कमाने के आरोप में जेल भी भेजा गया। इस तरह से दशकों की दोस्‍ती एक झटके में खत्‍म हो गई। लेकिन यह लंबे समय तक नहीं चला।

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