... तो कांग्रेस का डिप्रेशन सिद्धू दूर
... तो कांग्रेस का डिप्रेशन सिद्धू दूर

… तो कांग्रेस का डिप्रेशन सिद्धू दूर करेंगे

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। नवजोत सिंह सिद्धू ने आखिरकार कांग्रेस का हाथ पकड़ ही लिया। पंजाब में 20 दिन बाद विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। कांग्रेस उम्‍मीद कर रही है कि सिद्धू T-20 की तर्ज पर फटाफट उसकी काया पलट देंगे। पार्टी का डिप्रेशन दूर कर देंगे। उनके आने से पार्टी कार्यकर्ताओं को ऑक्‍सीजन मिलेगा, जो दस साल से औंधे मुंह पड़े है। जहां उसके आला नेता खेमों में बंटे हुए हैं। अब दोनों एक-दूसरे का सहारा बने हैं तो उम्‍मीद भी एक-दूसरे से ही करेंगे।

कांग्रेस को लगता है सिद्धू एक झटके में सब ठीक कर देंगे। अरे भाई, पार्टी में क्रिकेटर लाए हो … कोई डॉक्‍टर नहीं जो 10 वर्षों से जमा दुखों को एक झटके में खत्‍म कर देगा। वैसे सिद्धू मल्‍टी टैलेंटेड हैं और कांग्रेस उनके टैलेंट को भुनाना चाहती है। कांग्रेस सोच रही है कि सिद्धू ‘बादलों’ पर अच्‍छी तरह बरसते हैं। उन्‍हें स्‍टार प्रचारक बना दिया तो वोट भी बरसेंगे।

कांग्रेस को कैप्‍टन पर लगता है भरोसा नहीं रहा। होगा भी कैसे ब्‍लैकमेल करके प्रदेश अध्‍यक्ष जो बने थे। वैसे भी अब उनकी उम्र हो चुकी है इसलिए स्‍वाभाविक रूप से उनकी दहाड़ में एक मिठास सी आ गई है। लेकिन पार्टी ‘बादल’ को सिर्फ डराना ही नहीं, उन्‍हें सत्ता से हटाकर सत्ता पर काबिज होना चाहती है।

कांग्रेस को सिद्धू के मन में भी झांकना चाहिए। बेचारे खुद ही लंबे समय तक कन्‍फ्यूज रहे। भाजपा का दामन छोड़ने के बाद वह आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के दरवाजों के बीच झूलते रहे। इस कन्‍फ्यूजन का मैसेज भी तो लोगों तक गया न। फिलहाल तो सिद्धू को खुद के लिए वक्‍त चाहिए था, क्‍योंकि वीराने से आबादी में आए हैं। लेकिन पार्टी उनके कंधों पर बैठकर फटाफट मीडिया में छपने को बेकरार हो गई।

भाजपा छोड़ने के बाद सिद्धू ने ‘आवाज़-ए-पंजाब’ नाम से पार्टी बनाई। इसमें निर्दलीय विधायक बलविंदर सिंह बैंस और सिमरजीत सिंह बैंस, पूर्व ओलंपियन एवं हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह को शामिल किया। लेकिन तुरंत बाद ही परगट और सिद्धू की पत्‍नी डॉ. नवजोत कौर कांग्रेस में शामिल हो गए। बैंस बंधु आम आदमी पार्टी में चले गए। अपनी नई नवेली पार्टी में सिद्धू जी अकेले रह गए थे। अब अकेलेपन में तो थोड़ा बहुत डिप्रेशन तो स्‍वाभाविक ही है।

मुझे तो डर लग रहा है। सिद्धू को कॉमेडी शो में ठोको ताली की आदत है। कॉमेडी का स्रोत पार्टी में ही है… तो डर सा लग रहा है कि कहीं सिद्धू वहीं पर न शुरू हाे जाएं। नहीं समझे क्‍या? दरअसल रागा अर्थात् राहुल गांधी किसी गंभीर मसले पर भी बोलते हैं तो वह लतीफा बन जाता है। … अब तो समझ गए न।

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