'स्वयंवर' का टिकट नहीं मिला तो रुदाली
'स्वयंवर' का टिकट नहीं मिला तो रुदाली

‘स्वयंवर’ का टिकट नहीं मिला तो रुदाली ले आया ‘वर’

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नुक्कड़ टाइम्स। दिल्ली में प्रमुख सड़कें हैं- अकबर रोड और अशोका रोड। दोनों पर आजकल तमाशा लगा रहता है। कारण, अकबर रोड वाले घर की ‘बागी बेटियाँ’ भागकर अशोका रोड वाले घर में पहुंच जा रही हैं, जहाँ उनका ‘सामूहिक’ ब्याह करा दिया जा रहा है। ब्याह से पहले उनसे यह लिखवा लिया जाता है कि नए घर में आकर मैं खुश हूँ। पुराने घर यानि मायके में हमारी न तो ठीक से देखभाल हो रही थी और न ही हमारी जरूरतें पूरी की जा रही थी।

वैसे कायदे से तो दोनों घरों में समधियाने का सम्बन्ध बनता है, लेकिन दोनों घरों की आपस में बिलकुल नहीं बनती। लोग तो कहते हैं कि अशोका रोड वाले अकबर रोड वाले घर की ‘बेटियों’ को बिगाड़ रहे हैं। उन्हें उकसाते हैं। कहते हैं उस घर में तुम्हारी इज्जत ही नहीं तो हमारे घर आ जाओ। यहाँ तुम्हारा पूरा ख्याल रखेंगे और सभी इसी झांसे में फंस जाते हैं। लेकिन अंदरूनी हालत तो अशोका रोड वाले घर की भी अच्छी नहीं है। घर के बूढ़ों की तो दो कौड़ी की भी इज्जत नहीं और जवान हमेशा सहमे से दिखते हैं। इस घर में बोलते सिर्फ तीन लोग ही हैं, बाकी लोग सुनते हैं यानि तीन लोग फर्स्ट पर्सन शेष सभी सेकंड पर्सन।





इस घर का आँखों देखा हाल सुनिए। आपको तो मालूम है ही कि अगले महीने से पांच प्रदेशों में ‘स्वयंवर’ का आयोजन होने वाला है। लेकिन इसमें भाग वही ले सकता है जिसके पास टिकट हो। टिकट सिर्फ दो ही तरह के लोगों को मिलता है- जुगाड़ू और बिगाड़ू। आज उधर से गुजर रहा था तो देखा एक ‘वर’ घर से कुछ दूरी पर 25-30 लोगों को कुछ समझा रहा था। मैं भी भीड़ का हिस्सा बनकर सुनने लगा। तब पता चला ‘वर’ अपने साथ बाराती नहीं, बल्कि रुदालियाँ लेकर आया है। किसी बिगाड़ू ने इस जुगाड़ू के जुगाड़ को पलीता लगा दिया है। पहले यह टिकट की सूची में विवाह के गीत की तरह पहले नंबर पर बज रहा था। अब खिसक कर तीसरे पायदान पर लुढ़का दिया गया था। यानि ‘स्वयंवर’ से पहले ही विदाई की तयारी है। उस ‘वर’ ने रुदालियों से कहा, देख जा… अगर मना हो गईल त फर्स्ट पर्सन के नाम ले के हंगामा होय के चाहीं। अब तो समझ ही गए होंगे।

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