सीवेज से बनेगा क्रूड ऑयल
सीवेज से बनेगा क्रूड ऑयल

सीवेज से बनेगा क्रूड ऑयल

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दुनिया भर के शहरों में सीवेज का निस्तारण बड़ी समस्या बनती जा रही है। लेकिन कूड़े की तरह यह भी जल्‍द ही बिकने लगेगा और इसे हासिल करने के लिए कंपनियों में होड़ भी मचेगी। दरअसल, अमेरिका स्थित पैसिफिक नॉर्थवेस्ट नेशनल लैबोरेटरी (पीएनएनएल) ने हाड्रोथर्मल लिक्वीडेशन तकनीक से सीवेज से क्रूड ऑयल बनाने का फार्मूला तैयार किया है। वैज्ञानिकों की मानें तो सीवेज भविष्य का ईंधन है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तकनीक से तैयार बायोक्रूड को पारंपरिक रूप से रिफाइन कर बायो पेट्रोल, डीजल जैसे उत्पाद बनाए जा सकते हैं। अब तक माना जाता था कि सीवेज बायो ईंधन बनाने के लिए उपयोगी नहीं है। लेकिन हमारे शोध से यह धारणा बदल गई है। हमनें इस राह में पहले आने वाली कई समस्याओं का समाधान निकाल लिया है। इसका गीला होना बड़ी समस्या थी, लेकिन नई तकनीक में इसे सुखाने की जरूरत ही नहीं होगी। हाइड्रोथर्मल लिक्वीडेशन तकनीक से मानव अपशिष्ट ही नहीं, अन्य प्रकार के कचरे को भी ईंधन में बदला जा सकता है। 
कैसे काम करेगी तकनीक
इस तकनीक में अपशिष्ट पदार्थों पर 3000 पाउंड प्रति वर्ग इंच की दर से दवाब डाला जाता है। इससे रिएक्टर में स्वत: तापमान 660 फारेनहाइट पर पहुंच जाता है। इस परिस्थिति में मानव मल या अन्य कचरे की कोशिकाओं में विखंडन पैदा होने लगता है, जो बायोक्रूड की शक्ल लेता है।
हर तरह से फायदेमंद
पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ इस बायोक्रूड का इस्तेमाल ईंधन और रसायन उद्योग में उत्प्रेरक के रूप में किया जा सकता है। उर्वरक उद्योग में यह फॉस्‍फोरस अयस्क का विकल्प हो सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, केवल एक व्यक्ति के अपशिष्ट से साल में दो से तीन गैलन बायोक्रूड ऑयल बनाया जा सकता है। एक अनुमान के मुताबिक 34 अरब गैलन सीवेज रोज अमेरिका में शोधित होता है, इससे तीन करोड़ गैलन बायोक्रूड का उत्पादन किया जा सकता है। 
प्रयोग को अमलीजामा पहनाने का काम शुरू
पीएनएनएल ने इस तकनीक का लाइसेंस उटाह स्थित जेनीफ्यूल कॉरपोरेशन को दिया है। साथ ही वह कनाडा के वैंकूवर शहर सहित ब्रिटिश कोलंबिया के 23 नगरपालिकाओं के साथ काम कर रही है। माना जा रहा है कि 2018 में यह तकनीक वास्तविक रूप से काम करने लगेगी। इसपर 80 से 90 लाख डॉलर खर्च आने का अनुमान है।
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