मुग़ल-ए-आज़म बनने के पीछे की दिलचस्‍प
मुग़ल-ए-आज़म बनने के पीछे की दिलचस्‍प

मुग़ल-ए-आज़म बनने के पीछे की दिलचस्‍प कहानी

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स

भारतीय सिनेमा के इतिहास में मुग़ल-ए-आज़म अब तक की सबसे महंगी और बेहतरीन फिल्‍म है। उस जमाने में इस फिल्‍म के निर्माण पर पैसा पानी की तरह बहाया गया। इस पर डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हुए जो अभी के हिसाब से करीब 40 करोड़ होती है। फिल्‍म से ज्‍यादा इसके निर्माण से जुड़ी बातें और घटनाएं कहीं ज्‍यादा रोचक हैं।

दिलीप कुमार, मधुबाला नहीं थी पहली पसंद

फिल्‍म की भूमिका 1944 में बनी, लेकिन पहली शूटिंग शिड्यूल 1946 में हुई। तब दिलीप कुमार पहली पसंद नहीं थे। निर्माता-निर्देशक कमरुद्दीन आसिफ ने सबसे पहले चंद्र मोहन को अकबर, डीके सप्रू को सलीम और नर्गिस को अनारकली के लिए चुना था। 1953 में प्रिंसिपल फोटोग्राफी शुरू होने से पहले सुरैया को अनारकली का रोल ऑफर किया गया। 20 वर्षीय मधुबाला अनारकली का किरदार निभाने के लिए बहुत इच्‍छुक थीं। आखिरकार यह रोल उन्‍हें ही मिला। अभिनेता-अभिनेत्री को चुनने में ही लंबा वक्‍त लग गया तो निवेशकों ने हाथ खींच लिया। फिल्‍म शुरू हुई तो इसमें कई बदलाव किए गए इससे निर्माण लागत बढ़ती चली गई। एक वक्‍त ऐसा भी आया, जब आसिफ लगभग कंगाल हो चुके थे। उन्‍होंने ढेरों कर्ज लिए। आलम यह था कि सेट पर वह पान-सिगरेट भी उधार पीने लगे थे। आखिरकार 16 साल की मेहनत रंग लाई और 5 अगस्‍त, 1960 को फिल्‍म रिलीज हुई।

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