क्या आधार से प्राइवेसी को खतरा है?
क्या आधार से प्राइवेसी को खतरा है?

क्या आधार से प्राइवेसी को खतरा है?

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नुक्कड़ टाइम्स : महेंद्र सिंह धोनी के आधार कार्ड की जानकारी लीक होने के बाद आधार कार्ड की जरुरत और उसके सुरक्षित होने पर एक नयी बहस छिड़ गयी है।  हालाँकि सरकार की  तरफ से ये स्पष्ट कर दिया गया था कि आधार कार्ड की जानकारी पूरी तरह से सुरक्षित है और इसके कारण देश के किसी भी नागरिक को परेशां होने की जरुरत कभी नहीं पड़ेगी। फिर भी इस हालिया घटनाक्रम के बाद जो स्थिति बनी है आइये उसपर एक नज़र डालते हैं। आधार पर हमारा क्या दांव पर लगा है? इसे कई काम के लिए अनिवार्य बनाने से कोई फायदा होगा? हम आधार की इस उलझन को आपके लिए सुलझा रहे हैं:
आधार ऑप्शनल है या कंपलसरी?
7 साल पहले यानी जनवरी, 2009 में आधार को वॉलेंटरी स्कीम के तौर पर लाया गया था। तब केंद्र में यूपीए 2 सरकार थी। उसने नेशनल आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया बिल, 2010 संसद में पेश किया था, जिसके बाद इसके वॉलेंटरी वाले पहलू पर चर्चा हुई थी। उस वक्त एक संसदीय समिति ने सरकार ने कहा था कि भारत में इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा रहा है। यूपीए की तत्कालीन सरकार ने यह दावा किया था कि आधार इसलिए लाया जा रहा है ताकि सरकारी योजनाओं का फायदा सही लोगों तक अच्छी तरह पहुंचाया जा सके।
वहीं, अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी देशवासी के लिए आधार कार्ड हासिल करना अनिवार्य नहीं है। उसने कहा था कि किसी नागरिक को सरकारी योजनाओं का फायदा देने के लिए आधार कार्ड दिखाने की शर्त नहीं रखी जा सकती। पिछले साल देश की सबसे बड़ी अदालत ने फिर यही बात दोहराई।
हालांकि, हाल में सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार को अनिवार्य  बनाने का ऐलान किया, जिसे लेकर एक वर्ग काफी नाराज है। विपक्षी दलों ने भी इसकी आलोचना की है। आधार को टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए भी अनिवार्य  बनाया गया है। इसलिए जिनके पास आधार नहीं होगा, वे कानून की नजर में अपराधी हो जाएंगे। अब हर नागरिक को इसे लेना ही होगा।
 आधार के फायदे क्या हैं?
इसके समर्थकों का कहना है कि सिंगल आईडी से वेलफेयर स्कीम्स का फायदा लेना आसान हो जाएगा। वहीं, विरोधियों का कहना है कि सरकार आधार को अनिवार्य  नहीं बना सकती क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है। उनका कहना है कि आधार को अनिवार्य करने से एक कॉमन आईडी से जुड़े सभी डेटाबेस आपस में जुड़ जाएंगे। इससे सरकार किसी की भी जासूसी कर सकती है।
आधार को अनिवार्य  क्यों बनाया जा रहा है?
आधार समर्थकों का कहना है कि 99 पर्सेंट लोगों ने आधार को खुद चुना है। लेकिन क्या एलपीजी सब्सिडी और इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में इसके इस्तेमाल में फर्क नहीं है। अगर आधार वॉलेंटरी है तो फिर इसे लेने का दबाव कैसे डाला जा सकता है? एलपीजी सब्सिडी नहीं लेने वाला कानून की नजर में अपराधी नहीं है, लेकिन अगर कोई टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करता तो वह कानून की नजर में अपराधी होता है।
क्या आधार डेटाबेस सेफ है? क्या यूआईडीएआई का डेटाबेस हैक हो सकता है? क्या आधार डेटाबेस की मदद से किसी इंसान का प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है?
यूआईडीएआई सिर्फ ऑथेंटिकेशन के वक्त का डेटा दर्ज करता है। लेकिन जब अलग-अलग सर्विसेज के लिए आधार का कॉमन आईडी के तौर पर इस्तेमाल होने लगेगा, तब भी क्या यह बात सच रह जाएगी? क्या आधार के जरिये सरकार के पास बड़ा डेटाबेस हो जाएगा, जो आम नागरिकों के हितों के अनुकूल नहीं होगा। आधार यूजर अपना नंबर और बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन के लिए देता है। उसके बाद इन्हें यूआईडीएआई के पास क्रॉस-चेकिंग के लिए भेजा जाता है। यूआईडीएआई का डेटा एनक्रिप्टेड होता है, लेकिन यह पता नहीं है कि ऑथेंटिकेशन के लेवल पर क्या उसी तरह का एनक्रिप्शन है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि यूआईडीएआई डेटाबेस सिर्फ ऑथेंटिकेशन का डेटा स्टोर करता है या वह दूसरी पर्सनल जानकारियां भी स्टोर कर रहा है।
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