कामयाब नहीं हो सकी साज़िश
कामयाब नहीं हो सकी साज़िश

कामयाब नहीं हो सकी साज़िश

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ये 27 जून की ही रात थी, साल 2011 और वक़्त रात के यही क़रीब सवा दस बजे का। आईबीएन 7 में रहते हुए मैं हर रोज़ NRHM घोटाले की परतें उधेड़ रहा था। इसी दौरान अचानक लखनऊ के हज़रतगंज चौराहे पर बावर्दी आए पुलिस वालों ने मुझे और आईबीएन 7 के मेरे सहयोगी मनोज राजन त्रिपाठी को सरेआम उठा लिया।

धक्कामुक्की के दौरान हमारी मदद में जुटी भीड़ के बीच मनोज जी किसी तरह बच निकले, लेकिन मुझे हज़रतगंज थाने पर ले जाया गया। थाने में पहले से ही तमाम संगीन धाराओं में कई मुक़दमे दर्ज किए जा चुके थे। इंतज़ार था तो बस मुझे जेल भेजने का। पर ये सरकारी साज़िश कामयाब हो नहीं पाई। घटनास्थल से निकले मनोज राजन जी की सूचना पर अगले कुछ ही पल में लोग सड़कों पर उतर पड़े। इनमें ज़्यादातर मीडियाकर्मी साथियों के अलावा तमाम राजनीतिक दलों के नेता और बड़ी संख्या में आम लोग भी शामिल थे। कुछ ही देर में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती जी का सरकारी आवास घेर लिया गया और तेज़ बारिश के बीच ही एक बड़ा आंदोलन शुरू हो गया।

तत्कालीन संपादक राज़दीप सरदेसाई जी, आशुतोष जी और प्रबल प्रताप जी की अगुवाई में मेरे न्यूज चैनल ने भी मोर्चा खोल दिया। बाक़ी चैनलों और अख़बारों ने भी हमारा पूरा साथ दिया, आख़िरकार बड़े जनदबाव और मीडिया के साथियों के आंदोलन के आगे सरकार को झुकना ही पड़ा। दोषी अधिकारियों को निलंबित कर उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया। अगले दिन लखनऊ में इस घटना के ख़िलाफ़ एक पैदल मार्च भी निकाला गया। बाद में पता चला कि पूरी साजिश मुख्यमंत्री दफ्तर के एक प्रभावशाली अफ़सर की अगुवाई में रची गई थी। साजिश के एक हिस्से में तो बेहद ख़तरनाक योजना भी थी, पर ईश्वर की दया और शुभचिंतकों की दुआ मेरे काम आई।

इस घटना को अब इतने साल बीत चुके हैं। आज भी वो पल याद कर एकबार सिहर उठता हूँ, पर सच बताऊं तो दिल में अब किसी के लिए कोई मलाल नहीं है। हमले में शामिल रहे उन पुलिसवालों के लिए भी नहीं। मानता हूँ कि शायद उनकी वक़्ती मजबूरी रही होगी, पर हमेशा के लिए शुक्रगुज़ार और क़र्ज़दार हूँ उन सभी का जो संघर्ष की उस रात पूरी ईमानदारी से साथ खड़े रहे। उनके लिए भी जो दूर रह कर सलामती की फ़िक्र करते रहे। भावनाओं से जुड़े रहे। ऐसे प्यार के लिये ख़ुद को भाग्यशाली मानता हूँ। किसी एक का क्या नाम लूँ, यक़ीन मानिए, इस विपरीत हालात में किसी भी तरह साथ देने वाले सारे चेहरे हर वक्त मेरे दिल में हैं और हमेशा रहेंगे। सच आप सबका क़र्ज़ कभी नहीं उतार पाऊँगा।

 

(साज़िश शलभ मणि त्रिपाठी की फेस बुक वाल से )

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