शुक्र मनाइये कि नागिन बदल गई है
शुक्र मनाइये कि नागिन बदल गई है

शुक्र मनाइये कि नागिन बदल गई है

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। एक अजीज की शादी से लौटा था। देर रात तक नाच-गाना अौर दिनभर दूल्हे के परिजनों-रिश्तेदारों से गप्प-शप्प होती रही, इसलिए नींद पूरी नहीं हुई। बहुत थकान महसूस कर रहा था। लिहाजा लंबी नींद लेकर थकान उतारने की प्रबल इच्छा थी। मगर कमबख्त मोबाइल फोन मेरे बिस्तर पर पहले से लेटा था।

मैं अभी बिस्‍तर पर गिरा ही था कि whatsapp टोन कानों तक पहुंची। ग्रुप पर एक वीडियो क्लिप आई थी। डाउनलोड करते ही गाना बजा- ‘मैं नागिन-नागिन, नागिन-नागिन…।’ और मैं सोचने लगा-ये नागिन बचपन से आज तक पीछा नहीं छोड़ रही।

सातवीं क्लास का वो किस्सा भी याद आ गया। शनिवार का दिन था। उस दिन फन-डे होता था। मास्टरजी बच्चों से चुटकले, कविता, गाने आदि सुनते थे। उन दिनों ही एक फिल्म आई थी- नागिन। फिल्म में श्रीदेवी नागिन थी और अमरीश पुरी सपेरा। मैंने भी एक रात पहले ही ताजा-ताजा फिल्म देखी थी। मास्टरजी ने जब कहा- कुछ सुनाओ। मैंने भी झट से सुना दिया- मैं तेरी दुश्मन-दुश्मन तू मेरा, मैं नागिन तू सपेरा। अभी गाने का अंतरा ही पूरा हुआ था, मास्टरजी बोले- बैठ जा बेटा। मैं सपेरा और तू नागिन! मैं सोचकर हैरान था, मास्टरजी ने पूरा गाना क्यों नहीं सुना। मैंने तो अपने मुंह से गाने का म्यूजिक भी बजाया था-टेने नेने नेने नेने नेने, टेने नेने नेने ने…।

36खैर, उस दिन तो मास्‍साब साहब मेरी प्रतिभा को पहचान नहीं पाए। मुझे इसका कोई गिला-शिकवा नहीं। मुझे खुशी तब मिलती थी, जब मैं शादियों में इसी गाने पर जमीन पर लोट-लोट कर अपनी प्रतिभा दिखाते लोगों को देखता था। नाग होते हुए भी एक अादमी श्रीदेवी रूपी नागिन बनकर कच्चे-पक्के फर्श की धूल में लोट मार रहा होता और दूसरा उसके ऊपर रूमाल रूपी बीन लेकर अमरीश पुरी की तरह मंडरा रहा होता। इतने सालों तक बारात में यही होता रहा। लेकिन अब जमाना बदल गया है। बारात में अब पुरुषों की जगह महिलाएं नागिन बनकर जमीन पर लोटने लगी हैं।

दरअसल, whatsapp पर जो वीडियो आया था, वह उसी विवाह समारोह का था जिसमें थककर मैं लौटा था। हुआ यूं था कि विवाह समारोह के मंच पर जैसे ही उसने दुल्‍हन के गले में वरमाला डाली, उधर से डीजे वाले बाबू ने गाना चला दिया- ‘मैं नागिन-नागिन, नागिन नागिन, डांस नचना।’ मैं देखकर हैरान था कि डांस फ्लोर पर दूल्हे की सभी बहनें नागिन बनकर छटपटा रही थीं। नई नवेली दुल्‍हन भी देखकर हैरान थीं। शायद यह सोचकर हैरान हो रही थी कि इतनी नागिनों का सामना अकेली कैसे करूंगी।

उधर, डांस फ्लोर के एक छोर पर नागिन बनकर नाच रही महिलाओं के पति यानी दूल्हे के जीजा यह देखकर खुश हो रहे थे कि शुक्र है… खुद को नागिन तो माना! वरना आज तक तो पुरुष ही अकेले नाग होने का दंश झेल रहे थे। नागिनों को देखकर दुल्‍हन से रहा नहीं गया। दूल्‍हे के साथ फ्लोर पर आते ही उसने भी नागिन डांस शुरू कर दिया। जैसे साबित करना चाह रही हो कि मैं भी किसी से कम नहीं। राम बचाए इन नागिनों से….

(राकेश क्रान्ति की फेसबुक वाल से साभार)

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