क्या गीता प्रेस के दिन सुधरने वाले हैं
क्या गीता प्रेस के दिन सुधरने वाले हैं

क्या गीता प्रेस के दिन सुधरने वाले हैं

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योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या आदित्यनाथ के राज में गीता प्रेस के दिन सुधरेंगे। 95 साल के इतिहास में गीता प्रेस धर्म, संस्कृति और आध्यात्म से जुड़ी 63 करोड़ किताब छाप चुकी हैं। गोरखपुर की सबसे बड़ी पहचान हैं गीता प्रेस जो दुनिया भर में सबसे सस्ता धार्मिक साहित्य मुहैया कराने के लिए मशहूर है। गीता प्रेस में साल 2015 में हड़ताल हुई और बंद होने की अफवाह फैल गई थी।

गीता प्रेस के प्रबंधक लाल मणि तिवारी ने बताया कि हाल ही में जर्मनी से 11 करोड़ की कीमत से आधुनिक प्रिंटिंग मशीन लगाई गई है। चंदे के नाम पर कोई भी व्यक्ति गीत प्रेस के नाम को बदनाम ना करे क्योकि गीता प्रेस प्रबंधन कभी भी किसी से कोई चंदा नहीं लेता है। वहीं लाल मणि ने दावा किया कि योगी जी एक सासंद के रुप में गोरखपुर का काफी विकास किया है। अब वो सीएम हैं, प्रदेश के साथ-साथ गीता प्रेस के विकास का आशीर्वाद उनको मिलता रहेगा।

गोरखपुर की गीता प्रेस बेहद सीमित संसाधनों में चल रही है। वर्तमान में गीता प्रेस में लगभग 200 कर्मचारी काम करते हैं। योगी आदित्यनाथ गीतापुर प्रेस के संरक्षक भी हैं। ऐसे में गोरखपुर की बेहतरी और धर्म के प्रति बढ़े हुए रूझान का फायदा गीता प्रेस को मिल सकता है।

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