ग्रीन कार्ड का रेड सिग्नल
ग्रीन कार्ड का रेड सिग्नल

ग्रीन कार्ड का रेड सिग्नल

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अमेरिका में काम करने और अमेरिकी ज़िन्दगी जीने के लिए हर वर्ष अनेको भारतीय अमेरिका जाते हैं जिनमें से कुछ तो वापस आ जाते हैं और कुछ वहां का ग्रीन कार्ड हासिल करने में कामयाब हो जाते हैं। ग्रीन कार्ड अमेरिका की दूसरे दर्जे की नागरिकता है जिसे वहां काम कर रहे विदेशों से आये लोगों  को एक निश्चित समय तक रहने के बाद दिया जाता है। अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने के इक्छुक विदेशी मूल के लोगों को डोनाल्ड ट्रंप एक बड़ा झटका देने की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिका के दो प्रभावी सिनेटर्स ने संसद में संशोधन प्रस्ताव दिया है  जिसके मुताबिक अमेरिका अगले दस साल में कानूनी तौर पर रह रहे ग्रीन कार्ड धारकों की संख्या को घटाकर आधी कर देगा।

airport_nukkadtimesडोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के सिनेटर टॉम कॉटन और डेमोक्रैट पार्टी के सिनेटर डेविड पर्ड्यू ने यह प्रस्ताव देते हुए अमेरिका के इमीग्रेशन नियमों में बदलाव की शिफारिश की है जिससे प्रति वर्ष विदेशी मूल के नागरिकों की हो रही एंट्री की संख्या में बड़ी कटौती की जाएगी।

अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने के लिए वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को 10 से 35 साल तक का इंतजार करना पड़ता है। इस कानून के बनने के बाद यह इंतजार और कई साल बड़ा हो जाएगा। अमेरिकी संसद से इस प्रस्ताव को कानून बनने के बाद वहां रह रहे विदेशी नागरिकों को बड़ी मुसीबत झेलनी पड़ सकती है।  इसमें बड़ी संख्या में वह भारतीय नागरिक प्रभावित हो सकते हैं  जो वहा ग्रीन कार्ड या पर्मानेंट रेसिडेंसी का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

आज के समय में  अमेरिका प्रति वर्ष 10 लाख विदेशी नागरिकों को एंट्री देता है। इसे घटाकर 5 लाख किए जाने से उन सभी लोगों का अमेरिका में रहना मुश्किल हो जाएगा जिन्हें ग्रीन कार्ड या पर्मानेंट रेसिडेंसी नहीं मिली है।

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