सुलह की कोशिश बिना तलाक वैध नहीं:
सुलह की कोशिश बिना तलाक वैध नहीं:

सुलह की कोशिश बिना तलाक वैध नहीं: सलमान खुर्शीद

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उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने मुसलमानों में ‘तीन तलाक’, ‘निकाह हलाला’ और बहुपत्नी प्रथा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई सुबह से जारी है। यह सुनवाई लगातार 10 दिनों तक चलेगी। संविधान पीठ इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही है। पीठ यह देखेगी कि क्या यह धर्म का मामला है। अगर यह देखा गया कि यह धर्म का मामला है तो कोर्ट इसमें दखल नहीं देगी। लेकिन अगर यह धर्म का मामला नहीं निकला तो सुनवाई आगे चलती रहेगी। तीन तलाक से मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है या नहीं, इस पर कोर्ट देखेगी। बहुविवाह पर कोर्ट सुनवाई नहीं करेगा। सीजेआई ने साफ कहा कि पहले तीन तलाक का मुद्दा ही देखा जाएगा। इस सुनवाई में पहले तीन दिन चुनौती देने वालों को मौका मिलेगा। फिर तीन दिन डिफेंस वालों को मौका मिलेगा।

चुनौती देने वालों को बताना पड़ेगा कि धर्म की स्वतंत्रता के तहत तीन तलाक नहीं आता। वहीं डिफेंड करने वालों को यह बताना पड़ेगा कि यह धर्म का हिस्सा है। वहीं सुनवाई में शामिल कांग्रेस नेता और वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि अगर सुलह की कोशिश नहीं हुई हो तो तलाक वैध नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक की समीक्षा के लिए कहा है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि जरूरत पड़ी तो निकाह हलाला पर सुनवाई की जाएगी।  वहीं कोर्ट ने कहा, ‘हम ये समीक्षा करेंगे कि तीन तलाक धर्म का अभिन्न अंग है या नहीं।’

उत्तराखंड के काशीपुर की शायरा बानो ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर एकसाथ तीन तलाक कहने और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। साथ ही मुस्लिमों की बहुविवाह प्रथा को भी चुनौती दी थी।

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