हमारे सामने और कोई रास्ता बचा नहीं था :
हमारे सामने और कोई रास्ता बचा नहीं था :

हमारे सामने और कोई रास्ता बचा नहीं था : सुप्रीम कोर्ट के जज

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सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में आज पहली बार ऐसा हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ये बताना पड़ा कि सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। वरिष्ठ जज चलमेश्मवर ने कहा कि अनियमितताओं को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के सामने अपनी बात रखी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से बात की।

चार जजों ने सीजेआई के खिलाफ असंतोष को उजागर करने के लिए प्रेस कांफ्रेंस बुलाई। वहां उन्होंने जाहिर कर दिया कि केसों के बंटवारे और सीजेआई की कार्यशैली से उनमें गहरे मतभेद हैं। चार जजों ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाई, उसमें जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल रहे। ये चारों जज करीब 15 से 20 मिनट के लिए मीडिया से रू-ब-रू हुए। ये प्रेस कांफ्रेंस जस्टिस चेलामेश्वर के घर पर बुलाई गई थी।

प्रेस कॉन्फ्रेेस में कहा जस्टिस चलमेश्वर ने कहा , ”हम चारों इस बात से सहमत हैं कि जब तक इस संस्था को संरक्षित नहीं किया जाता है और इसकी समता को बनाए नहीं रखा जाता है, तब तक लोकतंत्र इस देश या किसी देश में बच नहीं सकता। लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए अच्छा लोकतंत्र के साथ स्वतंत्र और निष्पक्ष जज का होना जरूरी है। यहां जज प्रतीकात्मक है. दरअसल ये संस्था है।”

सात पन्नों की चिट्ठी में कई विवादों का जिक्र किया गया है। चिट्ठी में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर मनमाने रवैये का जिक्र किया गया है। चीफ जस्टिस और इन चार वरिष्ठ जजों के बीच अधिकारों को लेकर विवाद है। विवाद यह है कि केस किसके पास जाए, ये तय होने का अधिकार दिया जाना चाहिए। चिट्ठी में गुजरात का सोहराबुद्दीन एनकाउंटर को लेकर भी विवाद का जिक्र है।

उन्होंने कहा, ‘’अच्छे लोकतंत्र का होलमार्क स्वतंत्र न्यायपालिका है, यह राजनीतिक विवाद नहीं है। आज सुबह हम चार जज मुख्य न्यायधीश के घर भी गए थे और उनसे मिले किसी खास अनुरोध से लेकिन दुर्भाग्यवश हम उन्हें समझाने में असफल रहे कि हम सही हैं।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘’हमारे पास देश से संवाद करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था कि संस्था का ख्याल रखें और देश का ख्याल रखें। हम नहीं चाहते की 20 साल बाद कोई बुद्धजीवी हम चार जजों को ये ना कहें कि हमने अपनी आत्मा बेच दी, हमनें ये सब लोगों के सामने रख दिया है।’’

वहीं, इस विवाद पर केंद्र सरकार ने कहा है कि यह सुप्रीम कोर्ट का आपस का मामला है। इससे सरकार का कोई लेना देना नहीं है। जजों के बीच पैदा हुए विवाद को उन्हें खुद सुलझा लेना चाहिए।

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