सफल हुई तेरी आराधना... काहे तू रोये
सफल हुई तेरी आराधना... काहे तू रोये

सफल हुई तेरी आराधना… काहे तू रोये

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। भाजपा का जब-जब लिटमस टेस्‍ट होता है, तब-तब वह या ता रामजी के मंदिर भागती है या संतों के चरणों में लोटने लगती है। इस बार भी वह जुगाड़ के आशीर्वाद से खुद को लिफ्ट कराने में जुटी है। पिछली बार हरियाणा विधानसभा चुनाव में डेरा सच्चा सौदा के आशीर्वाद से सत्ता पर काबिज हुई। पंजाब में तीसरी बार अकाली-भाजपा की गठबंधन वाली सरकार बन जाए, इसके लिए उसने एक बार फिर गुरमीत राम रहीम के चरण पकड़ लिए हैं।
पंजाब में छोटे-बडे़ करीब 10,000 डेरे हैं और कई इलाकों में इनका अच्‍छा प्रभाव है। इनमें गुरमीत राम रहीम वाला डेरा सच्‍चा सौदा भी शामिल है। इसे देखते हुए कुछ दिनों से तमाम राजनीतिक दल आशीर्वाद पाने के लिए डेरों में मत्‍था टेकते फिर रहे हैं। भाजपा भी डेरा मुखी की परिक्रमा कर रही थी। आखिरकार उसे इसका फल मिला और डेरा सच्‍चा सौदा ने भाजपा के सिर पर अपना वरदहस्‍त रख ही दिया।
गुरमीत राम रहीम वाले डेरा सच्‍चा सौदा का मुख्‍यालय हरियाणा के हिसार जिले में है। इसकी प्रमुख शाखा पंजाब में बठि़डा जिले के सलाबतपुरा में है। पंजाब के लहरागागा, गिद्दड़बाहा, सरदूलगढ़, संगरूर, बरनाला, अमलोह, मलोट, बाघा पुराना, फरीदकोट, मुक्तसर, तलवंडी साबो, सनौर, फाजिल्का, रामपुरा फूल, मौड़ मंडी, भुच्चो, लुधियाना पश्चिम, शुतराना तथा समाना सीटों पर इसका ज्‍यादा प्रभाव है। इन इलाकों में डेरा प्रेमियों की तादाद काफी है।

पंजाब की राजनीति में डेरा सच्चा सौदा का दखल 2007 विधानसभा चुनाव में शुरू हुआ था। उस समय डेरे कांग्रेस को अपना समर्थन दिया था। इसके प्रभाव वाले 69 में से 37 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली थी। फिर भी वह सत्ता में नहीं आ पाई और अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार की वापसी हो गई। भाजपा को सबसे बड़ा खतरा इन्‍हीं सीटों से है, क्‍योंकि अकालियों के सत्ता में आते ही डेरा सच्‍चा सौदा के साथ उसका विवाद शुरू हो गया था। इसके कारण 2012 के चुनाव में डेरे ने चुनाव से खुद को दूर रखा।

हालांकि बीते कुछ महीनों से अकाली दल के साथ डेरा सच्‍चा सौदा का संबंध सामान्‍य है। फिर भी विवादों के कारण डेरा सच्‍चा सौदा और अकाली दल के बीच गहरी खाई बन गई है। चूंकि इसके प्रभाव वाले सीटों पर अकाली प्रत्‍याशी ही मैदान में हैं, इसलिए डेरामुखी की शरण में जाने के अलावा भाजपा के पास कोई और चारा नहीं था। अब आशीर्वाद मिल गया तो टेंशन काहे का। धन धन सत्गुरु तेरा ही आसरा!

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