हवाई जहाज से उपग्रह छोड़ने की तैयारी
हवाई जहाज से उपग्रह छोड़ने की तैयारी

हवाई जहाज से उपग्रह छोड़ने की तैयारी में जुटा चीन

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स। इसरो द्वारा एक साथ 104 रॉकेट छोड़ने के बाद से चीन हक्‍का-बक्‍का है और वह इसका तोड़ निकालने के प्रयासों में जुटा हुआ है। चीन अब अमेरिका की तर्ज पर हवाई जहाज से रॉकेट के जरिये उपग्रह छोड़ने की तैयारी कर रहा है। यह न केवल सस्‍ता होगा, बल्कि उपग्रह को भी कम समय में कक्षा में स्‍थापित किया जा सकेगा।




सबसे पहले अमेरिका ने 1990 में हवाई लॉन्‍च पैड से अंतरिक्ष मिशन सैटेलाइट डिलिवरी रॉकेट छोड़ा था। पूर्व ऑर्बिटल साइंस कॉर्प ने एक पेगासस रॉकेट विकसित किया था, जिसे रिफ्रेटेड बी-52 स्ट्रैटेजिक बॉम्बर से लॉन्च किया गया था। इसके जरिये दो छोटे उपग्रह कक्षा में भेजे गए थे। अब ढाई दशक बाद चीन इसी तर्ज पर उपग्रह प्रक्षेपण के लिए रॉकेट लॉन्च करने की योजना बना रहा है। नई पीढ़ी के इस रॉकेट को हवाई जहाज के माध्‍यम से अंतरिक्ष में लॉन्‍च किया जाएगा। The China Academy of Launch Vehicle Technology के प्रमुख ली टोन्‍यू के मुताबिक हवा से छोड़े जाने वाले रॉकेट निष्क्रिय उपग्रहों या आपदा राहत मामलों में उसकी जगह ले सकते हैं और पृथ्‍वी का अवलोकन करने में उपग्रहों के लिए मददगार हो सकते हैं।

ली ने यह भी कहा कि चीनी अकादमी में इंजीनियरों ने ऐसे मॉडल का डिजाइन बना लिया है जो पृथ्‍वी की निचली कक्षा में लगभग सौ किलाग्राम का पेलोड भेजने में सक्षम है। इन्‍हीं इंजीनियरों ने रॉकेट भी बनाए हैं। अब वे एक बड़ा रॉकेट बनाने की भी योजना बना रहे हैं जो 200 किलो भार कक्षा में ले जा सकेगा।




चीन ने उपग्रह प्रक्षेपित करने वाले रॉकेट पर काम पिछले साल जुलाई में ही शुरू कर दिया था। यह पहला मौका है जब चीनी अकादमी ने अपने दम पर न केवल भारी लोड रॉकेट का डिजाइन तैयार किया है, बल्कि इसे विकसित भी किया है। जमीन से तरल लॉन्‍चर की बजाय इन रॉकेटों को हवाई जहाज से छोड़ा जाएगा। इसके निर्माताओं के अनुसार, जमीन से तरल लॉन्‍चर के मुकाबले हवाई जहाज से इन रॉकेटों को ज्‍यादा तेजी से छोड़ा जा सकेगा।

चीनी इंजीनियरिंग अकादमी के शिक्षाविद लाँग लेहाओ का कहना है कि प्रत्‍येक अंतरिक्ष अभियान में ठोस ईंधन वाला एक रॉकेट शामिल होगा जिसे Y-20 से प्रक्षेपित किया जाएगा। यह 200 किलो वजनी उपग्रह को मात्र 12 घंटे में पृथ्‍वी की कक्षा से 700 किलोमीटर ऊपर सूर्य-समतुल्‍य कक्षा में तैनात करेगा। ऐसे उपग्रह प्रक्षेपक रॉकेट के अन्‍य फायदे यह हैं कि इन्‍हें कहीं भी तैनात किया जा सकता है। इसके लिए किसी तरह के सतही संरचना की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके अलावा, खराब मौसम का भी इस पर असर पड़ने की संभावना कम रहती है और प्रक्षेपण लागत भी कम आता है।

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