अमेरिका को ‘हड़काने वाले’ फिदेल
अमेरिका को ‘हड़काने वाले’ फिदेल

अमेरिका को ‘हड़काने वाले’ फिदेल कास्त्रो नहीं रहे

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हवाना। क्यूबा में वामपंथ के जनक, महान क्रांतिकारी और पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो नहीं रहे। 90 साल की उम्र में क्‍यूबा की राजधानी हवाना में उनका निधन हो गया। क्‍यूबा के राष्‍ट्रपति और उनके छोटे भाई राउल कास्‍त्रो ने शनिवार को सरकारी टेलीविजन के जरिये उनके निधन की सूचना दी।

फिदेल के 50 वर्षों के शासन के दौरान अमेरिका के दस राष्‍ट्रपति बदल गए। लेकिन अमेरिका की नाक के नीच उनका साम्राज्‍य जस का तस रहा। फिदेल अपनी जिद और कूटनीति की बदौलत क्‍यूबा को कभी अमेरिकी कदमों में झुकने नहीं दिया। अमेरिका की आंखों की किरकिरी माने जाने वाले कास्‍त्रो ने कहा था कि वह राजनीति से कभी संन्‍यास नहीं लेंगें। लेकिन 2008 में आंत के ऑपरेशन के बाद उन्‍हें राउल कास्‍त्रो को सत्‍ता की बागडोर सौंपनी पड़ी।

अमेरिका से बिल्‍कुल सटे क्यूबा में वामपंथ की मजबूत पकड़ है। यह कास्‍त्रो ही कर सकते थे। अमेरिका को आंख दिखाने की अपनी आदत के कारण वह दुनियाभर में प्रसिद्ध हो गए। उन्‍होंने अमेरिका के सबसे बड़े दुश्‍मन सोवियत संघ से नजदीकी बढ़ाई। 1960 में क्यूबा स्थित अमेरिकी फैक्ट्रियों पर कब्ज़ा जमा लिया, लेकिन अमेरिका बस कुनमुना कर रह गया।

फिदेल का स्‍वास्‍थ्‍य ठीक नहीं रहता था। हालांकि आधिकारिक तौर पर उनके स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी सूचनाएं गुप्‍त ही रखी जा रही थी। बीमारी के कारण अप्रैल से वह सार्वजनिक तौर पर नहीं दिख रहे थे। अप्रैल में ही आखिरी बार उन्‍होंने कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की कांग्रेस को संबोधित किया था। इस दौरान उन्‍होंने कहा था कि उनकी उम्र बढ़ रही है। उन्‍होंने कहा था, मैं जल्‍द ही 90 साल का हो जाऊंगा, जिसकी कल्‍पना मैंने कभी नहीं की थी।

कास्त्रो करीब 50 वर्षों तक क्‍यूबा में एक दलीय शासन व्‍यवस्‍था के प्रमुख रहे। वे 17 साल तक प्रधानमंत्री और 32 साल तक राष्‍ट्रपति रहे। क्‍यूबा उन चुनिंदा देशों में से एक हैं जहां अभी भी उपभोक्‍तावाद ने बाजारवाद और पूंजीवाद से काफी से दूरी बना रखी है।

क्यूबा क्रांति को कास्त्रो ने गरीबों के हक की लड़ाई करार दिया था। उनकी अगुआई में क्यूबा में अमेरिकी फैक्ट्रियों और प्लांटेशन पर कब्ज़ा किया गया। उन्‍हाेंने तत्‍कालीन सोवियत संघ से दोस्‍ती की। सोवियत संघ का झुकाव क्‍यूबा की तरफ देखकर 1961 में तो परमाणु युद्ध की नौबत आ गई थी। अमेरिकी हमले की आशंका के मद्देनजर सोवियत संघ क्यूबा में एक परमाणु मिसाइल ठिकाना भी बनाया। क्यूबा ने मित्र देश को अपनी सीमा में परमाणु मिसाइल तैनात करने की इजाजत भी दे दी थी। बाद में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच एक समझौता हुआ और सोवियत संघ ने इस ठिकाने को हटा लिया। कास्त्रो ने इस पर घोर आपत्ति जताई थी।

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