डॉक्‍टरों की लापरवाही की सजा 9 साल से
डॉक्‍टरों की लापरवाही की सजा 9 साल से

डॉक्‍टरों की लापरवाही की सजा 9 साल से भुगत रहा मासूम

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स, फतेहाबाद। हरियाणा के फतेहाबाद जिले में एक बच्‍चा 9 साल से जानवरों की तरह बेडि़याें में जकड़ा हुआ है। वह मानसिक रूप से विक्षिप्‍त है। मां-बाप का कहना है कि उनका बच्‍चा जन्‍म से ऐसा नहीं था। डॉक्‍टरों के गलत इलाज ने उसे मंदबुद्धि बना दिया। बच्‍चे को इस हालत में देखकर घुटने के सिवा उनके पास दूसरा कोई रास्‍ता नहीं है।

बच्‍चे की मां गोगा रानी के मुताबिक, उनका बेटा 7-8 साल का था, तब उसे तेज बुखार हुआ था। इलाज के लिए वह बच्‍चे को एक निजी अस्‍पताल में ले गईं। वहां पता नहीं कैसा इलाज किया कि बच्‍चे की हालत बिगड़ती चली गई। उन्‍होंने सिरसा, हिसार, बीकानेर और जयपुर के बड़े अस्‍पतालों में उसका इलाज कराया। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

इलाज में कंगाल हो गए

बकौल गोगा रानी, इलाज के दौरान उन्‍हें घर, जमीन और जानवर के साथ बर्तन तक बेचने पड़ गए। अब न उनके पास बच्‍चे के इलाज के लिए पैसे हैं और न ही डॉक्‍टरों के पास उसका कोई इलाज। बच्‍चे के इलाज के लिए आर्थिक मदद करने में पड़ोसी भी पीछे नहीं हटे। अब परिवार की आर्थिक हालत जर्जर हो चुकी है और वह हुडा सेक्‍टर में एक झोपड़ी में रहता है। 

बांध कर रखना लाचारी

पिता पांडुराम ने बताया कि पैसे के कारण बच्‍चे का इलाज छूट गया। शुरू में तो उन्‍होंने बच्‍चे को किसी तरह घर में रखा। जब वह घर में तोड़फोड़ और सामान को नुकसान पहुंचाने लगा तो उसे रस्‍सी से बांधा। लेकिन वह रस्‍सी काट कर भाग जाता और आसपास तोड़फोड़ करता। कई बार भाग जाता तो उसे ढूंढ़ना पड़ता था। इसलिए उसे लोहे की बेडि़यों में जकड़ना पड़ा।

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1 Comment

  1. अफसोस कुछ लोगों की लापरवाही किसी के जीवन भर का दर्द बन गया….

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