आजम को लेकर भी सपा में खींचतान संभव
आजम को लेकर भी सपा में खींचतान संभव

आजम को लेकर भी सपा में खींचतान संभव

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स ब्‍यूरो, नई दिल्‍ली। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच मंगलवार को फिर एक मुलाकात हुई। लेकिन यह मुलाकात बेनतीजा रही। लगातार बदलते समीकरण में किसी के समझ में कुछ नहीं आ रहा कि अगले घंटे में क्या नया घट सकता है। चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग से मिलने के अलावा और भी कुछ है जो मुलायम और अखिलेश के लिए परेशानी का सबब बन सकता है और वो है जनाधार।

सुप्रीम कोर्ट ने कह तो दिया कि धर्म और जात के नाम पर वोट गलत है लेकिन उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा राजनीति इसी के भरोसे है। आजम खां एक ऎसे शख्स हैं जिनको मुलायम और अखिलेश दोनों में से कोई भी खोना नहीं चाहेगा। मुस्लिम वोटों की जबरदस्त पकड़ है आज़म खां के पास। आज़म खान समाजवादी पार्टी से कई बार नाराज़ हुए, लेकिन हमेशा मना कर वापस लाया गया। 17 मई 2009 को मुलायम सिंह यादव के फैसले पर अमर सिंह और जयाप्रदा से नाराजगी के चलते आजम ने इस्‍तीफा दे दिया था। इसके कुछ दिन बाद ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने 25 मई, 2009 को आजम को सपा से छह साल के लिए निष्‍कासित कर दिया था। हालांकि लोकसभा चुनावों के चलते जल्‍द ही उनके निष्‍कासन को रद्द भी कर दिया गया था।

आज़म सिर्फ रामपुर ही नहीं पुरे प्रदेश के मुसलमानो पर अच्छी पकड़ रखते हैं। अभी तक आज़म का कोई बयान तो नहीं आया है लेकिन वो तय कर चुके हैं कि वो पिता के साथ जायेंगे या पुत्र के साथ। हालांकि वह बीच बचाव की एक कोशिश भी कर चुके हैं, अमर सिंह के निष्कासन पर उनकी खामोशी साफ दर्शाती है कि 2009 में जयाप्रदा और अमर सिंह के कारण अपने निष्कासन का बदला लेने का मौका वो चूकने वाले नहीं हैं।

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