अब आसानी से बनवाइये पासपोर्ट, सरकार ने
अब आसानी से बनवाइये पासपोर्ट, सरकार ने

अब आसानी से बनवाइये पासपोर्ट, सरकार ने नियम सरल किए

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नुक्‍कड़ टाइम्‍स ब्‍यूरो, नई दिल्‍ली। सरकार ने पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए नए नियमों की घोषणा की है। खास बात यह कि अब पासपोर्ट बनवाने के लिए जन्‍म प्रमाणपत्र देने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही, पासपोर्ट आवेदन में सिंगल मदर/सिंगल पैरेन्‍ट्स के लिए भी नियमों को आसान किया गया है। यानी अब माता-पिता में से किसी एक का नाम भी लिखा जा सकेगा। इसके अलावा, अनाथ बच्‍चों, विवाह से बाहर जन्‍मे बच्‍चों और साधु-संन्यासी भी आसानी से पासपोर्ट बनवा सकेंगे।

विदेश राज्‍यमंत्री वीके सिंह ने शुक्रवार को नए पासपोर्ट नियमों की घोषणा की। सरकार इस बाबत जल्द ही अधिसूचना जारी करेगी। नियमों में बदलाव की सूचना सभी पासपोर्ट कार्यालयों को दे दी गई है।

 ऐसे आसान बनाई प्रक्रिया
आवेदनकर्ता को अब 15 जरूरी दस्‍तावेजों की जगह 9 दस्‍तावेज भी जमा करने होंगे। नए नियम के मुताबिक ट्रांसफर/स्कूल लीविंग/ मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र, बीमा पॉलिसी पर दर्ज जन्‍म तिथि को जन्‍म प्रमाणपत्र माना जाएगा। साथ ही, कई तरह की सूचनाओं को स्वघोषित किया गया है। आवेदनकर्ता को माता-पिता में से किसी एक या कानूनी अभिभावक का नाम ही देना होगा। आवेदक की मांग पर पासपोर्ट पर माता-पिता में से किसी एक का ही नाम प्रकाशित किया जा सकेगा।
अब क्‍या नहीं देना होगा और क्‍या नहीं?
  • विवाहित लोगों को शादी प्रमाण पत्र या Annexure ‘K’ नहीं देना होगा।
  • तलाकशुदा या अलग हो चुके दंपति के पति/पत्‍नी का नाम लिखना अनिवार्य नहीं होगी।
  • अनाथ बच्चों के लिए अनाथालय या संस्‍थान के लेटरहेड पर जन्‍मतिथि मान्‍य होगी।
  • गोद लिए बच्चों के लिए सादे कागज पर सेल्फ डिक्लेरेशन दिया जा सकेगा।
    26/01/1989 के बाद जन्मे लोगों को अलग से जन्म प्रमाणपत्र नहीं देना होगा।
  • विवाह के बाहर जन्‍मे बच्चों के पासपोर्ट के लिए आवेदन के साथ सिर्फ़ Annexure G लगाना होगा।
  • सरकारी कर्मचारी जो पहचान पत्र या अपने संस्थान से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं ले पा रहे हैं वे आपात स्थिति में पासपोर्ट लेने के लिए स्वघोषित Annexure-‘N’ जमा करा सकते हैं। लेकिन उन्‍हें यह बताना होगा कि वे अपने संस्‍थान को पासपोर्ट आवेदन की जानकारी दे चुके हैं।
  • साधु-संन्यासी अपने गुरु का नाम अभिभावक के रूप में दे सकेंगे। बशर्ते उनके पास ऐसा प्रमाणपत्र हो जिसमें उनके अभिभावक के रूप में आध्यात्मिक गुरु का नाम दर्ज हो।
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