SC ने पद्मावत को दी हरी झंडी, चारों
SC ने पद्मावत को दी हरी झंडी, चारों

SC ने पद्मावत को दी हरी झंडी, चारों राज्यों का बैन खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पद्मावत फिल्म पर बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने चारों राज्यों में पद्मावत के बैन को खारिज कर दिया है। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और हरियाणा सरकार ने बैन लगा दिया था। इसके विरोध में फिल्म निर्माताओं ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए.एम. खानविलकर और जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ के सामने मामला रखा था।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर और रणवीर सिंह की ‘पद्मावत’ अब पूरे देश में एक साथ रिलीज होगी। ‘पद्मावत’ 25 जनवरी को रिलीज होनी है। गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान ने फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने बाकी राज्यों से कहा है कि वे इस तरह बैन के आदेश जारी न करें। निर्माता और फिल्म स्टारों को सुरक्षा दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब सेंसर बोर्ड ने सेंसर सर्टिफिकेट जारी किया है तो राज्यों को बैन करने का कोई अधिकार नहीं है।

फिल्म पर कुछ राज्यों में लगे बैन के खिलाफ प्रोड्यूसर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। मेकर्स का कहना था कि सेंसर बोर्ड से रिलीज की अनुमति मिलने के बाद इस फिल्म को बैन कैसे किया जा सकता है? अब इस मामले में फिल्म निर्माताओं को कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकारों के उस फैसले को निरस्त कर दिया जिसमें उन्होंने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टालने की राज्यों की दरख्वास्त को भी मानने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा-पहली नज़र में ये मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक का है। जब केंद्रीय फ़िल्म सर्टिफिकेशन बोर्ड ने फ़िल्म को अनुमति दे दी है तो राज्य रोक नहीं लगा सकते। कोर्ट ने राज्य सरकारों से कहा है कि फ़िल्म के प्रदर्शन से जुड़े लोगों की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी है। इस मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को होगी।

प्रोड्यूसर्स के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि वो केंद्र सरकार से गुजारिश करते हैं कि वो राज्यों के लिए डायरेक्शन जारी करे ताकि फिल्म की रिलीज में कोई दिक्कत पेश ना आए। हरीश साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- अगर राज्य ही फिल्म को बैन करने लगेंगे तो इससे फेडरल स्ट्रक्चर (संघीय ढांचे) तबाह हो जाएगा। यह बहुत गंभीर मामला है। अगर किसी को इससे (फिल्म से) दिक्कत है तो वो संबंधित ट्रिब्यूनल में राहत पाने के लिए अपील कर सकता है। राज्य फिल्म के सब्जेक्ट से छेड़छाड़ नहीं कर सकते।

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